Vedanta blast workers death: Vedanta Group पावर प्लांट हादसे में एक और गंभीर रूप से घायल श्रमिक की मौत हो गई है, जिससे मृतकों की संख्या 24 तक पहुंच गई है।
Vedanta Plant Accident Update: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और सिस्टम की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 24 हो गई है, जिससे कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, झारखंड के रहने वाले मनीष कुमार, जो गंभीर रूप से घायल थे, ने रायगढ़ के Lakhiram Medical College में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं 9 अन्य घायल श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।
इस हादसे के बाद लगातार बढ़ता मौत का आंकड़ा प्रशासन और कंपनी दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मृतकों में ज्यादातर मजदूर दूसरे राज्यों से आए थे, जो रोजी-रोटी की तलाश में यहां काम कर रहे थे। एक-एक कर सामने आ रही मौत की खबरों ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है।
घटना के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए Vedanta Group के चेयरमैन Anil Agarwal, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, जहां Naveen Jindal ने सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम बनाई गई है। इस टीम में पुलिस अधिकारियों के साथ फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो हादसे के तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बायलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा होने के कारण दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया था। इसी दबाव के चलते बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और जोरदार विस्फोट हुआ। फोरेंसिक टीम (एफएसएल) की रिपोर्ट में भी इसी वजह की पुष्टि की गई है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि प्लांट में मशीनों के रख-रखाव और संचालन के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था। सुरक्षा उपायों में कमी और निगरानी की लापरवाही को इस बड़े हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF) से भी मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अगर समय रहते तकनीकी खामियों और सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया जाता, तो शायद इतने बड़े नुकसान से बचा जा सकता था। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।