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वेदांता हादसे पर सियासत तेज! चेयरमैन अनिल अग्रवाल के समर्थन में उतरे भाजपा सांसद, FIR को लेकर दी दलील

Vedanta Plant Accident: वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद भाजपा सांसद नवीन जिंदल ने चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बचाव में बयान दिया। FIR में नाम शामिल करने पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग।

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वेदांता हादसे पर सियासत तेज (photo source- Patrika)

वेदांता हादसे पर सियासत तेज (photo source- Patrika)

Vedanta Plant Accident: छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण हादसे के बाद अब मामला केवल जांच और मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक और औद्योगिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। हादसे में कई लोगों की जान जाने और परिवारों के उजड़ने के बाद जहां एक ओर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत से जुड़े बड़े नाम अब इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने लगे हैं।

Vedanta Plant Accident: हादसे पर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

नवीन जिंदल, जो भारतीय जनता पार्टी के सांसद और जिंदल स्टील के चेयरमैन हैं, उन्होंने इस पूरे मामले में अनिल अग्रवाल का खुलकर बचाव किया है। सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने इस हादसे को “बेहद पीड़ादायक त्रासदी” बताया और कहा कि इससे प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता मिलनी चाहिए।

“मुआवजा और निष्पक्ष जांच जरूरी”

नवीन जिंदल ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि हादसे में प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, आजीविका का समर्थन और पूरी तरह निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह से तोड़ दिया है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिए।

FIR में नाम शामिल करने पर उठाए सवाल

हालांकि, जिंदल का सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर था कि जांच पूरी होने से पहले ही अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में क्यों शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूतों के किसी बड़े उद्योगपति को सीधे जिम्मेदार ठहराना न केवल न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि इससे निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

“समान मानक क्यों नहीं?”

नवीन जिंदल ने अपने तर्क में एक अहम तुलना भी पेश की। उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के प्लांट्स या रेलवे में हादसे होते हैं, तो क्या वहां के चेयरमैन का नाम सीधे एफआईआर में जोड़ा जाता है? उनके अनुसार, ऐसा नहीं होता—और यही मानक निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए। पहले निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, फिर सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

Vedanta Plant Accident: अनिल अग्रवाल के पक्ष में तर्क

जिंदल ने अनिल अग्रवाल की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक साधारण और पिछड़े वर्ग के परिवार से उठकर अपने दम पर एक वैश्विक उद्योग खड़ा करने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पावर प्लांट के दैनिक संचालन में अग्रवाल की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, इसलिए उन्हें सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

निवेश और ‘विकसित भारत’ का मुद्दा

जिंदल ने अपने पोस्ट में “Viksit Bharat” विजन का भी जिक्र किया और कहा कि देश को ऐसे उद्योगपतियों की जरूरत है, जो निवेश और निर्माण को बढ़ावा दें। उनका मानना है कि अगर बिना जांच के ही कार्रवाई होने लगेगी, तो इससे उद्योग जगत में असुरक्षा का माहौल बनेगा और निवेश प्रभावित हो सकता है। इस बयान के बाद यह मुद्दा अब और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक ओर जहां पीड़ित परिवार न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत निष्पक्ष जांच और संतुलित दृष्टिकोण की बात कर रहा है।