जांजगीर चंपा

मृत गर्भस्थ शिशु को लेकर आपरेशन के लिए तीन दिनों तक अस्पताल का चक्कर काटती रही प्रसूता, परिजन भड़के तब डॉक्टरों ने किया आपरेशन

- जिला अस्पताल के डॉक्टरों के कार्यशैली में नहीं हो रहा सुधार
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मृत गर्भस्थ शिशु को लेकर आपरेशन के लिए तीन दिनों तक अस्पताल का चक्कर काटती रही प्रसूता, परिजन भड़के तब डॉक्टरों ने किया आपरेशन
मृत गर्भस्थ शिशु को लेकर आपरेशन के लिए तीन दिनों तक अस्पताल का चक्कर काटती रही प्रसूता, परिजन भड़के तब डॉक्टरों ने किया आपरेशन

जांजगीर-चांपा. जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों के मनमाने रवैये की वजह एक एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है। इसका जीता जागता उदाहरण तब सामने आया। परिजन इस बात का आरोप लगा रहे है कि प्रसूता ५ माह के मृत गर्भस्थ शिशु को लेकर पिछले तीन दिन तक भटकती रही थी। जबकि इस बात की जानकारी डॉक्टरों को थी। उसके बावजूद भी ऑपरेशन कर उसे नहीं निकाला गया। परिजन के जब सब्र का बांध टूटा और वो जब भड़के। तब डॉक्टरों ने गुरुवार की सुबह आपरेशन कर मृत बच्चे को बाहर निकाला। इसके बाद महिला ने राहत की सांस ली।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों के कार्यशैली में सुधार नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से जिला अस्पताल में आए दिन हंगामा, घेराव, मारपीट की घटनाएं हो चुकी है। इसके बाद भी डॉक्टरों की मनमाने रवैये में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। हर बार की तरह बुधवार की रात फिर कुछ इसी तरह का विवाद हो गया। कूरियारी निवासी पीडि़त परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार प्रसूता कामता बाई का तीन दिन पहले सोनोग्राफी कराई गई थी। जिसकी सलाह जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने ही दी थी।

सोनोग्राफी में पता चला कि महिला के पेट में पल रहे ५ माह का गर्भस्थ शिशु की धड़कने नहीं चल रही थी। यानी उसकी मौत हो चुकी थी। पर इस बात की जानकारी रेडियोलाजिस्ट ने परिजनों के साथ डाक्टर को भी दी। पर संबंधित डाक्टरों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की। जिसकी वजह से महिला की परेशानी बढ़ती जा रही थी। जब परिजनों का गुस्सा फूटा तो डॉक्टरों द्वारा गुरुवार की सुबह महिला को लेबर रूम में ऑपरेशन कर मृत गर्भासथ शिशु को बाहर निकाला।

आए दिन शिकायतें
दो माह पहले भी कुटरा की महिला को इसी तरह की समस्या से जूझना पड़ा था। प्रसूता को यह कहकर बाहर रेफर कर दिया था कि महिला के पेट में पल रहा बच्चा मर चुका है। हालांकि इस मामले में डॉक्टर ने प्रसूता को यह नसीहत दी गई थी कि पास के किसी नर्सिंग होम में इलाज करा लो। महिला ने शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती हुई और उसने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।

-ग्रामीण अंचल के मरीजों में जानकारी का अभाव रहता है। वे नियमित सोनोग्राफी नहीं कराते। अंतिम समय में वे अस्पताल पहुंचते हैं। किरित वाले मामले की जानकारी मुझे नहीं है। क्योंकि मैं बाहर हूं। मामले की जांच कराएंगे। -डॉ. यूके मरकाम, प्रभारी सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
- प्रसूता के पेट में बच्चा पल रहा था उसकी धड़कने थम गई थी। इस कारण उसकी आईवीडी करानी थी। बुधवार की रात को उसे भर्ती कराकर उचित इलाज किया जा रहा है -डॉ. रवि नंदनी दुबे, डे अफसर

Updated on:
16 Nov 2018 01:50 pm
Published on:
16 Nov 2018 01:50 pm
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