
Chhattisgarh News: जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम केसला में मुक्तिधाम के अभाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। शनिवार को ग्राम केसला के खोलबहरा साहू पिता स्व. बट्टू लाल साहू के निधन के बाद एक बार फिर यह संवेदनशील समस्या सामने आई, जब परिजनों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा।
बरसात के मौसम में बारिश की आशंका के बीच चिता जलानी पड़ी। इससे शोकाकुल परिवार को अत्यंत कठिन परिस्थतियों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को सक्ती जिले के ग्राम सोंठी में ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई थी जो सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी थी। ठीक इसी तरह शनिवार को ग्राम केसला में देखने को मिला।
दरअसल, गांव में आज भी एक भी मुक्तिधाम नहीं है। आज भी ग्रामीण खुले में शव का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। इस संबंध में गांव की सरपंच अंबिका यादव ने बताया कि केसला में वर्षों से एक भी मुक्तिधाम नहीं है। बारिश के दिनों में खुले मैदान में शव अंतिम संस्कार करना न केवल कष्टदायक होता है, बल्कि कई बार जलभराव, तेज हवा और मौसम की मार के कारण चिता जलाने में भी बाधाएं आती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति मानवीय गरिमा के प्रतिकूल है और प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
सरपंच ने बताया कि सरकार मनरेगा योजना के तहत मुक्तिधाम की अनुमति दे रही, लेकिन मनरेगा के पैसे दो साल में स्वीकृत होता है। उनका मानना है कि आज भी उनके गांव में हुए विकास कार्य जो मनरेगा योजना में हुए हैं उसमें १२ लाख रुपए सरपंच के पाकेट से घुस चुका है। इसके चलते वह फिर से मनरेगा से मुक्तिधाम बनाना नहीं चाहती। क्योंकि योजना में पूरे पैसे पाकेट से लगानी पड़ती है।
इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत सरपंच अम्बिका यादव द्वारा समय-समय पर संबंधित विभागों को लिखित आवेदन दिए जा चुकी हैं। हाल ही में गर्मी में सुशासन तिहार में अफसरों को ज्ञापन सौंपा था लेकिन कोई काम नहीं आई। कलेक्टर जनदर्शन एवं मुख्यमंत्री जनदर्शन रायपुर में भी ज्ञापन प्रस्तुत किया गया जा चुका है। बावजूद आज तक किसी भी स्तर से स्वीकृति या कार्रवाई का जवाब नहीं मिला है। क्या यही सरकार का सुशासन है।