शासकीय घास भूमि से ग्रामीणों की निस्तारी का हक
डभरा. डभरा तहसील के ग्राम छुछुभांठा एवं किरारी में स्थित शासकीय घास भूमि से ग्रामीणों की निस्तारी का हक मात्र इसलिए छीना जा रहा है क्योंकि बाबा रामदेव महाराज पतंजलि योगपीठ क्षेत्रीय संगठन समिति छुछुभांठा किरारी गांव में आचार्य कुलम विद्यालय खोलना चाह रही है।
इसके लिए पंचायत व प्रशासन ने मिलीभगत करके उनके नाम पर जमीन की लीज जारी करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली और ग्रामीणों को तब पता चला जब दावा आपत्ति के लिए समय देने के लिए विज्ञापन जारी किया गया।
रामदेव बाबा के ऊपर इन दिनों भाजपा सरकार इस कदर मेहरबान है कि उनके किसी भी प्रोजेक्ट के लिए किसी का भी हित मिट्टी में मिलाने को तैयार हैं। डभरा तहसील के अंतर्गत ग्राम छुछुभांठा एवं किरारी में कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहां पतंजलि का एक विद्यालय खोलने के लिए चाउर वाले बाबा के निर्देश पर जिला प्रशासन ने ग्रामीणों का हक मार दिया है।
ग्राम पंचायत एवं प्रशासन ने मिलकर गुपचुप तरीके से बिना किसी मुनादी के पटवारी हल्का नं. 20 ग्राम छुछुभांठा में स्थित शासकीय घास भूमि खसरा नंबर 194 रकबा 8.077 हेक्टेयर और खसरा नंबर 195 में रकबा 7.099 हेक्टेयर सहित कुल 0.20 एकड़ और ग्राम किरारी स्थित शासकीय घास भूमि ख.नं. 6 रकबा 1.619 हेक्टेयर में से 0.04 एकड़ भूमि को आचार्य कुलम की स्थापना के लिए लीज पर के की प्रक्रिया पूरी कर डाली।
इसके बाद यह आवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डभरा के माध्यम से जांच हेतु तहसील न्यायालय को मिला और उसमें दावा आपत्ति के लिए 25 मई की तिथि निर्धारित की गई। दावा आपत्ति का विज्ञापन पढ़कर ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बेचारे तपती धूप में पेशी के लिए तहसीलदार न्यायालय डभरा पहुंचे और ग्राम छुछुभांठा के ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज कराया गया है। विरोध दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों में शिवशंकर जोल्हे, मोहन कुर्रे, नारायण सिदार, महेश कुमार सिदार, छोटेलाल कुर्रे, शिवनारायण कुर्रे, लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह के सदस्यगण एवं ग्राम किरारी के ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज कराया है।
मवेशियों के हक मारने का आरोप
छुछुभांठा की घास भूमि 20 एकड़ एवं किरारी की 0.04 एकड़ जमीन को आचार्य कुलम विद्यालय रामदेव महाराज पतांजली योगपीठ हरिद्वार को व्यापारिक उपयोग के लिए दी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे मवेशियों के लिए चारागाह नहीं बचेगा। ग्रामीणों का कहना है ग्राम पंचायत के सरपंच बिना बैठक बुलाए व जन सुनवाई कराए यह सब गुपचुप तरीके से किया है।