जांजगीर चंपा

इस स्कूल के एक कमरे में लगती है पांच कक्षाएं, भवन भी है जर्जर

प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई
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प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई

जांजगीर-चांपा. शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की उपेक्षा एवं अनदेखी की वजह से बलौदा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कोरबीँ के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला लपेटापारा की स्थिति काफी बदहाल है।

इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है। जिसमें कुल 34 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। परंतु पांचों कक्षा का संचालन एकमात्र शिक्षक साधन कुमार भारद्वाज के जिम्मे है। शिक्षाविभाग द्वारा 2010 मे अतरिक्त कक्ष का निर्माण कराया गया था। उसी मे संचालित होती है पांच कक्षाओं के लिए जगह कि कमी कि वजह से आधे मे स्कूल के समान रखने कि मजबूरी व बचे हुए आधे जगह मे बच्चों कि पढाई। होती है। एक ही कमरे में पाचों कक्षाओं का संचालन किया जाता है।

जिस कारण विद्यालय में पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। इस संबंध में स्कूल के एकमात्र पंचायत शिक्षक ने बताया कि अकेले रहने के कारण उन्हीं को कार्यालयी कार्य संपादित करना पड़ता है तथा बीआरसी, संकुल व बैंक संबंधी किसी भी कार्य में जाने को लेकर विद्यालय को बंद रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

स्कूल मे एक और शिक्षक प्रमोद कुमार देवांगन पदस्थ है जो साल भर से बिना किसी सूचना के अनुपस्थिति है। एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। हालात ये हैं कि पांच कक्षाओं की पढ़ाई एक शिक्षक के भरोसे होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

अभिभावक सोचते हैं कि उनके बच्चे भविष्य बनाने के लिए विद्यालय गये हैं, लेकिन वहां तो पांच कक्षाएं एक शिक्षक के भरोसे है और सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पांच कक्षाओं का संचालन एक शिक्षक कैसे करता होगा। ऐसे में यहां छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित कराने संबंधी सरकार के दावे पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।


ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिंगल टीचर के सहारे चलने वाले इन स्कूलों में किसी तरह से पढ़ाई हो सकेगी। मात्र एक अध्यापक द्वारा पांच-पांच कक्षाओं के चार-चार विषय किस प्रकार से पढ़ाएं जा रहे है। राज्य में केंद्र व प्रदेश सरकार के क्वालिटी एजुकेशन की बातें जमीनी स्तर पर हवा-हवाई होती हुई नजर आ रही है। बच्चों के लिए नींव का कार्य करने वाले प्राइमरी स्कूलों के ऐसे हाल से स्कूलों में शिक्षा का स्तर कैसे सुधर पाएगा। प्रदेश की सरकार और शिक्षा विभाग का एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह से दम तोड़ता हुआ नजर आ रहा है।

अधिकारी के रवैये से बनते है ऐसे हालात
ब्लॉक मे ऐसे कई स्कूल है, जहां शिक्षकों कि कमी है। जानकारी होने के बावजुद अधिकारी हाथ पे हाथ धरे बैठे है। जिसका खामियाजा स्कूल के बच्चों को भूगतना पडं रहा है। शिक्षकों की कमी का मुख्य कारण शिक्षकों को अन्य कार्यालयों में अटैचमेंट कर देना व स्कूलो मे आवश्यकता से अधिक शिक्षको पदस्थ करना। जिसकी वजह से लम्बे समय से यह समस्या बनी हुई है।

Published on:
01 Aug 2018 08:43 pm
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