घटना सुनकर मवेशी मालिक सड़क पर पहुंचे
जांजगीर-चांपा. बम्हनीडीह बिर्रा मार्ग में गोविंदा ग्राम के पास सोमवार की सुबह तेज रफ्तार ट्रक ने एक- एक कर 13 मवेशियों रौंद डाला। इसके अलावा कई मवेशियां सड़क पर जिंदगी और मौत से जूझ रहीं हैं। मवेशियों के मालिक सड़क पर अपने मवेशियों की हालत देखकर आंसू बहाते नजर आए। अब उन्हें अफसोस हो रहा है कि यदि वे रात को ही अपने मवेशियों को सुरक्षित अपने घरों में रखे होते तो आज यह देखने को नहीं मिलता।
दरअसल सोमवार की सुबह दर्जनों मवेशियों को बम्हनीडीह रोड के गोविंदा मेन रोड के पास भारी वाहनों ने अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर 13 मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दो की हालत गंभीर होने से जिला पशु चिकित्सालय लाया गया है। इतनी बड़ी घटना सुनकर मवेशी मालिक सड़क पर पहुंचे और आक्रोशित होते दिखाई दिए। मानव जीवन की मौत होती तो वे चक्काजाम करते, लेकिन खुद की लापरवाही के चलते इतनी बड़ी घटना होते देख भी वे किसी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सके। क्योंकि उन्हें पता है कि वे अपने घरों की मवेशियों को खुले में छोड़ खुद गल्ती की है।
मवेशियों की सुरक्षा के लिए न तो मवेशी मालिक गंभीर दिखाई पड़ते है और न ही वाहन मालिकों को स्पीड नियंत्रण से सरोकार रहता। इसके चलते मवेशियां सड़क पर हर रोज रौंदे जाते हैं। इस तरह की घटना कोई नई बात नहीं है। इस मार्ग में आए दिन इस तरह के हादसे होते रहते हैं। बीते 6 अगस्त को भी इसी तरह की घटना में बनारी रोड के अमरताल नैशनल हाइवे की सड़क पर अज्ञात वाहनों ने दर्जनों मवेशियों को रौंद दिया था। मौके पर पांच मवेशियों की मौत हो गई थी। वहीं दो की हालत गंभीर होने से उसे जिला पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पत्रिका व्यू
जिम्मेदार हो जाइए सावधान
सड़क पर मवेशियों के रौंदा जाने के लिए कोई और नहीं बल्कि मवेशी मालिक जिम्मेदार हैं। साफ तौर पर कहा जा सकता है कि मवेशी मालिक ही उन्हें काल के गाल में समाने मजबूर कर रहे हैं। यदि मवेशी मालिक शाम ढलते ही अपने मवेशियों को उन गायों की तरह अपने घर ले जाते जो गाय अपने बछड़े को दूध पिलाती है या फिर व्यवसायी गायों से गाढ़ी दूध निकालते हैं। तब ऐसी घटना नहीं घटती और मवेशियां दुर्घटना के शिकार नहीं होती। वहीं दूसरी ओर यह कहा जा सकता है कि गांव में चारागाह की समस्या के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं। चारगाह भूमि में अतिक्रमण कर लोग घर बना रहे हैं। इसके चलते मवेशियों को चारागाह के लिए स्थान नहीं मिलता है। नतीजतन मवेशियां सड़क पर डेरा डाल रहीं हैं।