- नागपंचमी पर दलहा पहाड़ में मेला का आयोजन किया गया है।
जांजगीर. बुधवार नागपंचमी का त्योहार मनाया गया। इस दौरान घरों में नाग नागिन की चित्र बना कर पूजा की गयी। वहीं सपेरे भी नाग नागिन के जोड़े लेकर गलियों मे घूमते रहे। जगह-जगह लोगों ने श्रद्धा पूर्वक नागदेवता की पूजा अर्चना की। हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। नागपंचमी पर दलहा पहाड़ में मेला का आयोजन किया गया है।
15 अगस्त को स्वतंत्रता पर्व के साथ ही नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है।। नागपंचमी के दिन सर्प जैसे विषैले जीव को भी दूध पिलाकर सत्कार करने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे एक संदेश भी छिपा है। अगर शत्रु आपके द्वार पर हिंसा की भावना से प्रवेश करे और आप उसका स्वादिष्ट भोजन से सत्कार करें तो काफी हद तक संभावना है कि शत्रु का आपके प्रति व्यवहार नरम अवश्य हो जाएगा।
बारिश के समय सर्प भी किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते है। सारे जीव-जन्तु अपने बिल से बाहर निकलकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश करते हैं। ऐसे में ये जहरीले जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश करके हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। गांवों में आज भी जो पुराने मकान है, उनमें घर के मुख्यद्वार पर ऊंची देहरी बनी होती है। जीव-जन्तुओं के लिए बार्डर रेखा का काम करती है, जिससे आसानी से कोई जीव-जन्तु घर में प्रवेश न कर पाए। नागपंचमी के दिन देहरी पर मिट्टी की कटोरी में दूध रखा जाता है। यदि कोई जहरीला जीव-जन्तु घर में प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो वह सबसे पहले रात्रि के अंधेरे में चमकते हुए दूध देखकर आकर्षित होगा और ग्रहण करेगा।
घर की देहरी पर क्यों रखते है दूध
जितने भी जहरीले जीव-जन्तु हैं उनके लिए दूध विष के समान है। यदि वे दूध ग्रहण करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जायेगी। जैसे कहा जाता है कि शराब पीने के बाद दूध का सेवन न करे, क्योंकि शराब पीने के बाद दूध का सेवन करने से वह शरीर में जहर बन जाएगा। ठीक उसी प्रकार मान्यता है कि यदि सर्प के जहर के साथ दूध मिलने पर, उसकी मृत्यु हो जायेगी।