Ration Card: फर्जी राशन कार्डों की जांच के लिए फूड अफसर फिल्ड में उतरने जा रहे हैं। बता दें कि 2 लाख 25 हजार लोगों के नाम संदेह के दायरे में है..
Ration Card: जांजगीर-चांपा में 60 फीसदी राशनकार्ड उपभोक्ता सरकार के संदेह के दायरे में हैं। सरकार उन्हें राशन जरूर दे रही है लेकिन उनके राशनकार्ड सरकार के मापदंड में खरे नहीं है। ( Ration card ) अब ऐसे राशनकार्डों का सत्यापन किया जाएगा। ताकि वास्तविक राशन कार्डों व उनके सदस्यों का पता चल सके। जिले में 3 लाख 40 हजार राशन कार्डधारी परिवार हैं। इतने राशन कार्ड में 11 लाख सदस्य हैं। इतने राशन कार्ड में तकरीबन दो लाख 25 हजार सदस्य सरकार की नजर में संदिग्ध है।
अब इन राशन कार्डों का सत्यापन किया जाएगा। फूड अफसर इनकी जांच करेंगे और रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। आपको बता दें कि सरकार मुफ्त में राशन तो दे रही लेकिन अब भी कई सदस्य स्वर्ग सिधार चुके हैं या फिर परिवार के सदस्य दो-दो स्थानों से सरकारी राशन का उठाव कर रहे हैं। ऐसे लोगों की छटनी करना अनिवार्य माना जा रहा है। ताकि सरकार की आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम हो सके। सरकार ने खाद्य अफसरों को फील्ड में लगाकर कार्डों का सत्यापन करना चाह रही है ताकि वास्तविक लोगों को राशन का लाभ मिल सके।
फूड अफसरों की माने तो अब राशन कार्डों को आधार कार्ड से लिंक्ड करेंगे। ताकि संबंधित राशन कार्डधारी की आय तक पहुंचा जा सके। इसके अलावा पेन कार्ड से भी जांच की जा सकती है। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित राशनकार्ड धारी की आय कितनी है। जिन राशनकार्डधारी का आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक्ड नहीं है उनका कार्ड राशन कार्ड से लिंक किया जाएगा। ताकि संबंधित व्यक्ति की आय स्पष्ट हो सके।
फूड विभाग से जानकारी के मुताबिक राशन के बेजा इस्तेमाल के लिए ग्रामीण अंचल के कृषक वर्ग के लोग शामिल हैं। अब ऐसे किसान जिनके पास ढाई एकड़ से लेकर 5 एकड़ के बीच भूमि हो वही पात्र की श्रेणी में आएंगे। पांच एकड़ से अधिक भूमिस्वामी संदिग्ध की श्रेणी में आएगा। ऐसे राशनकार्डधारियों के नाम बीपीएल की श्रेणी से अपात्र माना जाएगा। वहीं जिनकी आय 6 लाख से अधिक है वह भी अपात्र की श्रेणी में आएगा। साथ ही ऐसे हितग्राही जो 25 लाख रुपए तक जीएसटी का भुगतान करता हो सहित अन्य केटेगरी की जांच पड़ताल की जाएगा।