
रंगपंचमी पर सबसे अनूठी लट्ठमार होली (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: यूं तो रंग पंचमी क्षेत्र में पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है, लेकिन पंतोरा में मनाई जाने वाली लट्ठमार पंचमी का अपना अलग ही अंदाज है। राधा की नगरी बरसाना में आज के दिन लट्ठ मारने की परंपरा है, कुछ इसी तरह इस दिन गांव की युवतियां बांस की पतली छड़ी से लोगों की पिटाई करते हैं। लट्ठमार पंचमी में मार खाने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण पहुंचते हैं। इस परंपरा के बारे में गांव के बुजुर्ग ने बताया कि आज से तकरीबन डेढ़ से दो सौ वर्ष से पूर्व इस गांव को बसाने वाले मालगुजार देवान ठाकुर द्वारा इस छड़ीमार पंचमी की शुरूआत की गई।
ग्रामीणों के अनुसार, उस समय गांव में महामारी, हैजा का प्रकोप होते रहता था, इससे ग्रामीणों की मौत हो जाया करती थी। उनकी बताई किवदंती के अनुसार एक बार मालगुजार देवान ठाकुर को मां भवानी ने स्वप्र में बताया कि पंचमी के दिन कुंवारी कन्याओं द्वारा मां की पूजा कर छड़ी द्वारा युवकों को मारने से गांव में इस तरह की बीमारी से बचा जा सकता है। तब से लेकर आज तक लट्ठमार पंचमी के दिन लड़कियों से मार खाने को लोग अच्छा मानते हैं।
बुजुर्ग द्वय ने बताया कि मां भवानी पर ग्रामीणों की इतनी अटूट आस्था है कि इसके बाद आज तक गांव में किसी को इस तरह की बीमारी का सामना करना नहीं पड़ा। इस परंपरा के अनुसार रंग पंचमी की पूर्व संध्या पर गांव से 10 किमी दूर ग्राम कंठी स्थित मां मड़वारानी मंदिर में पूजा की जाती है। मंदिर के आसपास काफी संख्या में बांस के पेड़ हैं, जिसे ग्रामीण डंगाही कहते हैं। डंगाही तोड़कर मड़वारानी मंदिर में लाकर उसमें रंग गुलाल लगाकर उसकी पूजा की जाती है। यहां से बैगा सुबह पंतोरा पहुंचकर मां मड़वारानी दाई के मंदिर में डंगाही व देवी मां की पूजा करते हैं।
साथ ही नौ कुंआरी कन्याओं की मां भवानी के मंदिर में गुलाल लगाकर पूजा की जाती है, फिर इन कन्याओं द्वारा छड़ी से सर्व प्रथम मां भवानी को भी पांच- पांच बार मारा जाता है। इसके बाद गांव के अन्य देवी देवताओं को भी छड़ी मारी जाती है। फिर लड़कियां डंगाही लेकर गांव में निकल पड़ती हैं, और लोगों को मारना शुरू करती हैं। उनके पीछे ढोल नगाड़े बजाते, रंग खेलते बड़ी संख्या में ग्रामीण होते हैंं।
Published on:
09 Mar 2026 01:06 pm
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