जांजगीर चंपा

48 घंटे से अंधेरे के आगोश में समाए 40 गांव, चौतरफा तबाही का मंजर

कहीं बिजली के खंभे टूटे तो कहीं तार टूट कर गिर गई
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कहीं बिजली के खंभे टूटे तो कहीं तार टूट कर गिर गई
कहीं बिजली के खंभे टूटे तो कहीं तार टूट कर गिर गई

जांजगीर-चांपा. शुक्रवार को बलौदा क्षेत्र में आई तबाही की आंधी ने क्षेत्र के लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। अकलतरा व बलौदा ब्लॉक के तकरीबन 40 से अधिक गांवों में तेज आंधी के चलते बिजली गुल हो गई।

कहीं बिजली के खंभे टूटे तो कहीं तार टूट कर गिर गई। इसके चलते क्षेत्र के लगभग 40 गांव में बिजली पानी के लिए लोगों में त्राहि-त्राहि मच गई है। बिजली नहीं आने से लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा है। शादी ब्याह का सीजन, ऊपर से तबाही की आंधी और भीषण गर्मी ने सिर का पसीना पांव तक पहुंचा दिया है।

घरों में बच्चे गर्मी से परेशान होकर रोते बिलखते देखे जा रहे हैं। गांव के हैंडपंप तक सूखे पड़े हैं। लोगों पीने के पानी के लिए दूर दराज क्षेत्रों से पानी मंगाना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात कि विद्युत वितरण कंपनी का अमला अभी भी यह कह रहा है कि बिजली की बहाली अगले 24 घंटे संभव नहीं है। जबकि पिछले 24 घंटे से क्षेत्र में बिजली नहीं है।


शुक्रवार की शाम को अचानक आई तबाही की आंधी ने लोगों को खून के आंसू रोने मजबूर कर दिया है। तबाही का मंजर तब देखने को मिला जब रात को तेज आंधी के कारण बलौदा क्षेत्र के हरदी, जर्वे, डोंगरी, औंराईकला, सराईपानी, बरपाली, बरबसपुर, खोंड़, पचरी सहित 40 गावों में बड़े से बड़े पेड़ सड़क और बिजली खंभे के उपर गिरे पड़े हैं। इससे एक ओर जहां सड़क जाम हुई तो दूसरी ओर बिजली गुल है।

बिजली नहीं आने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों के घरों के बोर ठप पड़ गए हैं। लोगों की हैंडपंप या फिर कुएं से पानी मिलने की उम्मीद भी टूट चुकी हैं, क्योंकि वह पहले ही सूख चुके हैं। लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। एकाध हैंडपंप चल भी रहे हैं। उसमें लोगों की लाइन लगी हुई है। एक बाल्टी पानी लेने के लिए लोगों को एक घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है।


तूफान से तीन टावर हुए क्षतिग्रस्त
बलौदा से लगे चारपारा से शनिचरा मार्ग पर पांच वर्ष पूर्व भरारी से भैसमा के बीच 765 केवी की लाईन खींची गई थी। शुक्रवार के शाम को जबरदस्त आंधी आने के कारण शनिचरा रोड से लगे तीन टावर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। आंधी इतनी जबरदस्त थी कि उसने टावर को पुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे लगाए गए टावर की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।


शादी के बाद पनस हुई विधवा
आप लोगों के मन मे ये विचार आ रहा होगा कि यह पनस कौन है यह पनस एक कटहल का वृक्ष है। इस वृक्ष की शादी गत पच्चीस अप्रैल को बड़े ही धूमधाम से की गई थी। बलौदा विकाखंड के चारपारा स्कूल के बने मंच के दोनों तरफ कटहल के पेड लगाये गये थे।

इन दोनों पेड़ों को जैक और पनस का नाम दिया गया था। लेकिन शादी के दो दिन बाद आई तेज आंधी में जैक टूट कर गिर गया और पनस विधवा हो गई। शायद प्रकृति को यह शादी मंजूर नहीं थी। चारपारा स्कूल के शिक्षकों ने पर्यावरण सरक्षण का संदेश देन के उदेश्य से इस शादी का आयोजन किया था।


सीएसपीडीसीएल की व्यवस्था की खुली पोल
गर्मी से निपटने के लिए विद्युत वितरण कंपनी मेंटेनेंस करती है, ताकि आंधी तूफान के दौर से आसानी से निपटा जा सके। बिजली खंभे के आसपास के पेड़ों की कटाई की जाती है ताकि आंधी तूफान से बिजली का आंच न आए, लेकिन विद्युत मंडल के तैयारियों कलई तब खुल जाती है

जब हल्की सी आंधी आने के बाद से 24-24 घंटे तक बिजली गुल कर दी जाती है। इसके बाद भी मेंटेनेंस नहीं हो पाता। कुछ इसी तरह की समस्या शुक्रवार को सामने आई जिसमें विद्युत वितरण कंपनी से 48 घंटे में भी बिजली सुधार नहीं पाई।


शादी घरों में अधिक तबाही
शादी वाले घरों में लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि हरदी महामाया सहित आसपास के हर गांवों में दर्जनों शादियां हो रही है। जहां घर के लोग बिना बिजली पानी के तड़प रहे हैं। मेहमाननवाजी करने गए लोग बिजली पानी की समस्या को देखते हुए बैरंग लौट रहे हैं।

कई घरों में मेहमानों को भी आसपास के हैंडपंप से पानी लाकर निस्तारी करना पड़ रहा है। शादी वाले घर के लोग गर्मी के चलते बीमार पड़ रहे हैं। क्योंकि शादी वाले घरों के कमरों में भीड़ की वजह से बच्चों को बीमारी का खतरा रहता है। गर्मी की वजह से बच्चे हीट स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं।

Published on:
29 Apr 2018 11:44 am
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