
नवागढ. सरकारी जमीन को सुरक्षित रखने के लिए सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है, लेकिन अवैध बेजाकब्जाधारी प्रशासन के सारे सपनों पर पानी फेरने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। एक तरफ जिले के कलक्टर सरकारी जमीन को सुरक्षित कर वहां लाल झंडे लगवा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं के मातहत अधिकारी चंद पैसों की लालच में शासकीय जमीन पर पक्का निर्माण तक होने दे रहे हैं।
नवागढ़ के रांछाभाठा में खुलेआम शासकीय जमीन पर मुरुम उत्खनन के साथ ही वहां पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। इस बात की जानकारी होते हुए क्षेत्र के तहसीलदार, नायब तहसीलादर, आरआई व पटवारी आंख मूंद कर बैठे हैं। हालत यह है कि अब एसडीएम के निर्देश का पालन करना भी वह उचित नहीं समझ रहे हैं। यहां भू माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए दिन-रात शासकीय भूमि पर बेजा कब्ज़ा कर वहां पहले रात में जेसीबी चलाकर मुरुम निकालते हैं
उसके बाद उसी जमीन को अपना बताकर वहां मकान बनाकर लोगों के सस्ते दाम में बेंच दे रहे हैं। राछाभाठा के लोगों ने बेजकब्जाधरियों का विरोध करते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही, लेकिन कोई कार्यवाही न होने से वह पूरी तरह से उदास हो गए हैं।
अधिकारी बन रहे अंजान
राछाभाठा स्थित बन रहे मकान में रातों-रात मकान बनाकर बेचने का खुला खेल चल रहा है यहां तक की बीते कुछ दिनों में यहां दर्जनों घर लाखों में बिक चुके हैं। जबकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
सरकारी जमीन की धड़ल्ले से खरीदी-बिक्री
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राछाभाठा में शासकीय ज़मीन की खरीदी-बिक्री भी नगर पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा शासकीय भूमि बेचने का आरोप लग रहे हैं अधिकारियो द्वारा अगर जांच की जाय तो दूध का दूध का पानी का पानी हो जाएगा।