जांजगीर चंपा

प्रशासन का झूठा आदेश दिखाकर इस तरह लूटा जा रहा ग्रामीणों को

कुछ लोग गरीबों से वसूली का काम पहले करना शुरू कर देते हैं

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कुछ लोग गरीबों से वसूली का काम पहले करना शुरू कर देते हैं

जांजगीर-डभरा. इसे विडंबना कहें या फिर शासन प्रशासन की लचर व्यवस्था। केंद्र या राज्य सरकार जो भी योजना चलाती है उसकी आड़ में कुछ लोग गरीबों से वसूली का काम पहले करना शुरू कर देते हैं। यह लगभग सभी योजनाओं में ही हो रहा है, उनके पास बकायदा पत्र क्रमांक सहित जिला प्रशासन का झूठा गरीबों से वसूली का काम पहले करना शुरू कर देते आदेश भी होता है। बतौर इसके कोई प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं करती है। इससे जांजगीर जिले के गरीब जिनके पास दो जून के लिए खाने के पैसे नहीं हैं वह ठगे जा रहे हैं।


ऐसा ही एक ताजा मामला डभरा क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां कुछ युवक जनपद पंचायत मालखरौदा के आदेश व स्वच्छ भारत निर्मल भारत लिखा बिल्ला लिए हुए गांव-गांव जाकर लोगों से उनके घर का नंबर आवंटित किए जाने के नाम पर 30-30 रुपए की वसूली कर रहे हैं। उनके द्वारा लोगों से कहा जा रहा है कि यदि वह रसीद नहीं लेगें तो उनके घर का नंबर नहीं आवंटित होगा और इससे उनके घर का चिन्हांकन शासन की योजनाओं के लिए नहीं हो पाएगा। फिर क्या था मरता क्या न करता। बेचारे भोले-भाले गरीब अपनी फटी पोटली से किसी तरह 30-30 रुपए निकाल कर इन युवाओं के पास पहुंचकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह अपराध खुलेआम दिन दहाड़े किया जा रहा है, लेकिन इस पर न तो ग्राम पंचायत सरपंच, न क्षेत्र अन्य जनप्रतिनिधि और न ही कोई अधिकारी का ध्यान जा रहा है। सभी ने इन लोगों को खुलेआम लूट की छूट दे रखी है।

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झारखंड की कल्याण संस्था का नाम
जब पत्रिका की टीम ने युवक से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह जन कल्याण नाम की संस्था से है जो कि झारखंड की है। उसने बताया कि उसका एक कार्यालय जांजगीर शहर में है, लेकिन अधिकारी कौन है और कार्यालय कहां है उसे जानकारी ही नहीं है।


प्रभारी सीईओ ने जारी किया आदेश
मालखरौदा जनपद पंचायत के प्रभारी सीईओ एलएन साहू ने गरीब जनता से लूट का यह आदेश 16 मई 2018 को जारी किया है। उनके आदेश में बाकायदा पत्र क्रमांक 2044 दर्शाया गया है और छग पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 57 के तहत हाउस नंबर आवंटित करने का जिक्र किया गया है। आदेश में अतिरिक्त कलेक्टर जांजगीर चांपा डीके सिंह के संलग्न पत्र का हवाला देते हुए इसके लिए 30 रुपए का शुल्क लेने का हवाला भी दिया गया है। इस संबंध में जब एडीएम डीके सिंह को फोन लगाया गया तो कई बार फोन करने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया।


ऐसे कई मामलों हो चुकी है लूट
यह कोई पहला मामला नहीं है जब गरीबों से इस तरह की लूट हुई है। बम्हनीडीह क्षेत्र में भी पत्रिका ने ऐसा ही खुलासा किया था जब ग्रामीणों से श्रम विभाग का कार्ड बनवाने के नाम पर वसूली की गई। श्रम अधिकारी वीआर पटेल ने अब तक कोई कार्यवाही इस पर नहीं की है। इसके साथ प्रधान मंत्री आवास योजना के नाम पर भी कई लोगों से लूट की गई। इसमें कई गरीबों को आत्महत्या जैसा कदम तक उठाने को मजबूर होना पड़ा।

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Published on:
21 May 2018 11:25 am
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