जांजगीर चंपा

#topic of the day : पूरे धैर्य के साथ शिक्षक को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए

पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे

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पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे

जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में शिक्षक योगेंद्र शुक्ला उपस्थित हुए। उनका मानना है कि शिक्षकों का प्रमुख कार्य विद्यार्थियों को पढ़ाना है और इस कर्तव्य का पालन पूरे धैर्य के साथ करना चाहिए। बच्चों की बुद्धि स्तर का आंकलन कर पढ़ाया जाए तो उन्हें सिखने में आसानी होती


शिक्षक योगेंद्र शुक्ला शिक्षक संगठन से भी जुड़े हैं और इस संबंध में उन्होंने बताया कि स्कूल के समय के बाद शिक्षकों के पास अपनी समस्या सुलझाने का समय नहीं बचता, जिनकी मदद करने शिक्षकों का संगठन बनाया गया है। समस्या सुलझाने अपने क्लास समाप्त करने के बाद का समय उपयोग किया जाता है। जनपद व जिला पंचायत के साथ शिक्षा विभाग के कार्यालयों तक पहुंचना होता है,

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जहां शिक्षकों के समस्या का समाधान किया जाता है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के बीच सामंजस्य बनाना सबसे अहम होता है। यही सूत्र शिक्षकों को स्कूल में भी अपनाने सलाह दिया जाता है। विद्यार्थियों से हिलमिल कर रहने व उनको जितने सरल व सहज शब्दों में समझाया जा सकता है, समझाना चाहिए। इससे विद्यार्थी आसानी से सिखते हैं और हमेशा के लिए याद रखते हैं। शिक्षकों को बच्चों के साथ पालकों के साथ तालमेल बिठाना भी अनिवार्य होता है।

इससे बच्चे अपने गृहकार्य को बड़े मनोयोग से करते हैं, जब घर में पालक स्कूल की गतिविधियों के बारे चर्चा करते हैं। उन्होंने बताया कि पालकों की सहानुभूति भी शिक्षकों के साथ होती है। यही शिक्षकों को पालकों की ओर से पुरस्कार होता है। पालक भी बड़े मनोयोग से अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं और उनकी इस कसौटी में शिक्षकों को हमेशा खरा उतरना है।


ग्रामर के प्रति बढ़ा रुझान
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रजी को लेकर मान्यता है कि इससे पढ़ाई की इच्छा ही खत्म हो जाती है। संधि विच्छेद करते हुए बताया कि ग्रामर को गांवों में ग्राम+मर कहा जाता है। ग्रामर का नाम सुनते ही बच्चे स्कूल छोड़कर भाग जाते थे, लेकिन जब से चुटीले अंदाज में सूत्रों के अनुसार समझाया जा रहा है, ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अंग्रेजी विषय में 90 अंक से अधिक ला रहे हैं। बच्चों का ग्रामर के प्रति रुझान बढ़ा है।


मूल्यांकन का ट्रीपल पी फार्मूला
उन्होंने बताया कि ट्रीपल पी अर्थात प्रेजेंटेशन, प्रेक्टिस तथा प्रोडक्शन से विषय की जानकारी का मूल्यांकन किया जा सकता है। प्रेजेंटेशन से आशय बच्चों के सामने ब्लेक बोर्ड में लिखना और उन्हें विषय की जानकारी देना। प्रेक्टिस से आशय बच्चों को बताए गए जानकारी पर नियमित अभ्यास कराना तथा प्रोडक्शन से आशय विषय को जानने के बाद बच्चे किस तरह जानकारियों को लागू कर रहे हैं।

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Published on:
04 Apr 2018 08:37 pm
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