
Mobile Tower Suicide: जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र के धुमाडांड गांव में मंगलवार तड़के एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई। एक युवती ने कुनकुरी थाने के सामने स्थित मोबाइल टावर पर चढ़कर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि युवती घटना के दौरान अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देख रही थी, जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
मृतका की पहचान नीलिमा लकड़ा के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक नीलिमा पिछले काफी समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और उसका इलाज भी चल रहा था। परिवार ने बताया कि उसे मोबाइल पर आत्महत्या और फांसी लगाने से जुड़े वीडियो देखने की गंभीर लत लग गई थी। कई बार समझाने और रोकने के बावजूद वह ऐसे वीडियो देखना नहीं छोड़ रही थी। इससे पहले भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन उस समय परिवार ने समय रहते उसे बचा लिया था।
परिजनों के अनुसार, घटना से एक दिन पहले नीलिमा अपनी मां के साथ अस्पताल गई थी। इलाज के बाद अचानक वह लापता हो गई। रात के दौरान पुलिस पेट्रोलिंग टीम को वह मिली थी, जिसके बाद उसे घर लौटने के लिए कहा गया था। परिवार को लगा कि वह सुरक्षित घर पहुंच जाएगी, लेकिन सुबह तड़के उसने ऐसा कदम उठा लिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
घटना से पहले तड़के करीब 4 बजे नीलिमा ने खुद डायल 112 पर कॉल किया और कहा कि “थाने में कोई नहीं है।” सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो उसने कहा कि वह सिर्फ यह देखना चाहती थी कि पुलिस कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देती है। इस बात के बाद पुलिस को अंदेशा नहीं था कि वह कुछ देर बाद इतना बड़ा कदम उठा सकती है।
सुबह करीब 5 बजे स्थानीय लोगों ने युवती को मोबाइल टावर पर चढ़ा देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी देर तक उसे समझाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि वह नीचे उतरने के लिए मान भी गई थी, लेकिन अचानक मोबाइल पर कोई वीडियो देखते हुए उसने फंदा लगाकर जान दे दी। मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले सब कुछ खत्म हो चुका था।
घटना के बाद पुलिस ने शव को टावर से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवती मोबाइल पर कौन सा वीडियो देख रही थी और क्या उसका इस घटना से कोई सीधा संबंध है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल कंटेंट की निगरानी कितनी जरूरी है। खासकर युवाओं में बढ़ती मोबाइल लत और आत्मघाती कंटेंट तक आसान पहुंच गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।