19 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

PM Matsya Sampada Yojana: छत्तीसगढ़ में मछली पालन से बढ़ी कमाई, 7 हजार हितग्राहियों को मिला बीमा सुरक्षा का लाभ

Jashpur Fisheries Growth: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है। जशपुर में रिकॉर्ड मछली उत्पादन, आधुनिक तकनीक, अनुदान और विभिन्न सुविधाओं से हजारों मत्स्यपालक लाभान्वित हो रहे हैं।

4 min read
Google source verification
PM Matsya Sampada Yojana

मत्स्य पालन बना ग्रामीण समृद्धि का आधार (photo source- Patrika)

PM Matsya Sampada Yojana: छत्तीसगढ़ में खेती के साथ-साथ अब मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रहा है। कभी केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित रहने वाला यह क्षेत्र आज हजारों परिवारों के लिए आय, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुका है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों ने मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा दी है।

विशेष बात यह है कि अब मत्स्य पालन केवल उत्पादन और बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, अनुदान और बीमा सुरक्षा जैसी सुविधाओं ने इसे एक सुरक्षित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान, युवा और स्वयं सहायता समूह इस क्षेत्र से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

Jashpur Fish Production: जशपुर बना मत्स्य विकास का नया मॉडल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर ने मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। पिछले 22 महीनों में जिले ने 22 हजार 805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि केवल उत्पादन बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण आय और रोजगार में आए बदलाव का भी प्रमाण है। मत्स्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 18.50 करोड़ स्पॉन, 2.55 करोड़ स्टेज फ्राय और 2.94 करोड़ मत्स्य बीजों का संचयन किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है।

सात हजार से अधिक परिवारों को मिला लाभ

जशपुर जिले में 77.67 हेक्टेयर तालाबों और 295.27 हेक्टेयर जलाशयों का पट्टा आवंटित किया गया है। इसके साथ ही नाव, जाल, फिंगरलिंग, विपणन सहायता और मत्स्य बीमा जैसी सुविधाओं के जरिए सात हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया गया है। इन योजनाओं का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी मत्स्य पालन एक व्यवहारिक और लाभकारी व्यवसाय बन गया है। पहले जहां संसाधनों की कमी और जोखिम के कारण लोग इस क्षेत्र में निवेश करने से बचते थे, वहीं अब सरकारी सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है।

Fisheries Insurance Scheme: बीमा सुरक्षा से बढ़ा भरोसा

मत्स्य व्यवसाय में प्राकृतिक आपदाएं, जल स्रोतों की समस्या और अन्य जोखिम हमेशा चुनौती बने रहते हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही मत्स्य बीमा सुविधा मत्स्यपालकों के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रही है। बीमा सुविधा के कारण मत्स्यपालकों को यह भरोसा मिला है कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में उनकी मेहनत और निवेश पूरी तरह जोखिम में नहीं जाएगा। यही कारण है कि अब अधिक से अधिक किसान इस क्षेत्र से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादकता

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब निर्माण, पौंड लाइनर, बायोफ्लॉक यूनिट और अन्य आधुनिक संरचनाओं की स्थापना के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है। साथ ही उत्पादन लागत में कमी और गुणवत्ता में सुधार से मत्स्यपालकों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। बायोफ्लॉक जैसी तकनीकें ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम बनकर उभरी हैं।

प्रशिक्षण से बदल रही सोच

मत्स्य पालन को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए किसानों और स्वयं सहायता समूहों को देश के विभिन्न राज्यों में एक्सपोजर विजिट पर भेजा जा रहा है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान मत्स्यपालक तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण और आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इसका सीधा असर उत्पादन और लाभ दोनों पर दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय के विविधीकरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है। खेती पर निर्भरता कम होने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में जिस तरह से मत्स्य उत्पादन, तकनीकी नवाचार, बीमा सुरक्षा और प्रशिक्षण को एक साथ जोड़कर काम किया जा रहा है, वह राज्य के ग्रामीण विकास मॉडल को नई पहचान दे रहा है।

Rural Economy Chhattisgarh: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ में मत्स्य क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ रहे हैं। बीमा सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों का समावेश इस क्षेत्र को और अधिक मजबूत बना रहा है।

आज जशपुर समेत प्रदेश के कई जिले इस बात के उदाहरण बन रहे हैं कि सही नीति, तकनीक और सरकारी सहयोग मिलने पर मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। यही मॉडल आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।