नगर में एक भी जगह सिग्नल नहीं, अस्थायी अतिक्रमण करने वालों को नोटिस, स्थाई पर चुप्पी
झाबुआ. पुलिस एक ओर यातायात सप्ताह मना रही है, वहीं यातायात कैसे सुधारा जाए इसकी फिक्र नहीं है। जागरूकता के लिए नाटकों को माध्यम बना रही है पर यातायात के समाधान के लिए वक्त नहीं निकाल पा रही। 50 हजार से अधिक आबादी वाले नगर में यातायात व्यवस्था 21 यातायात कर्मियों के भरोसे है। यातायात सुचारू करने पर विभाग का ध्यान नहीं। नगर में एक भी जगह सिंग्नल नहीं है। शहर के संकीर्ण मुख्य बाजार में आने-जाने के लिए एकांकी मार्ग जैसी कोई व्यवस्था नहीं। शहर की सडक़ों पर यातायात नियम का कोई असर नहीं। नगर की जनसंख्या के हिसाब से गाडिय़ों की संख्या ज्यादा है।
शहर में हर घर में एक से अधिक वाहन है। इस कारण शहर में वाहन पार्किंग की समस्या हो गई। जिला मुख्यालय होने के बाद भी शहर में एक भी स्थान पर पार्किंग स्थल नहीं है। बाजारों में व्यापारी अपनी दुकान के सामने वाहन खड़े कर रहे हैं। इससे संकीर्ण गलियों में लगे बाजार में आने जाने वालों को असुविधा हो रही है। व्यापारियों द्वारा सडक़ों तक दुकानें लगाई जा रही है। दुकानों के बाहर ओटले बनाकर नालियों पर कब्जे किए हैं। इन सबसे सडक़ों के अकार में कमी आई है। नगर के अधिकतर व्यापारियों ने नागरीय एवं शहरी विकास प्राधिकरण की नियम शर्तों को ताक पर रख नवनिर्मित शॉपिंग सेंटर में भी पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं की। समय-समय पर बाजार में अस्थायी अतिक्रमण करने वाले व्यापारियों को नोटिस दिया जाता है पर स्थाई अतिक्रमण को अनदेखा किया जा रहा है।
60 फ ीट की सडक़ सिमट कर 10 फ ीट हुई
बस स्टैंड फ व्वारा चौक पर बाजार करने आए लोग अपनी गाडिय़ां अव्यवस्थित तरीके से पार्क करते हैं। जबकि यहां यातायात जवान की ड्यूटी भी है। इसके अतिरिक्त आजाद चौक पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर के सामने रोड के दोनों और पार्किंग की जा रही है। यहां 60 फीट की सडक़ पार्किंग की वजह से सिमट कर 10 फ ीट के संकीर्ण मार्ग में तब्दील हो चुकी है। यहाँ भी ट्रैफि क जवान की ड्यूटी रहती है। शहर के राजवाड़ा स्थल की हालात सबसे दयनीय है। यहां मौजूद एक भी प्रतिष्ठान में पार्किंग नहीं है। इस कारण राजवाड़े का आकार भी सिमट गया। गोपाल चौक पर बेतरतीब वाहन खड़े किए जाने से सामने से आता वाहन नजर नहीं आने के दौरान कई हादसे हो चुके है। नेहरू मार्ग, सुभाषमार्ग, लक्ष्मीबाई मार्ग, रोहिदास मार्ग, राधाकृष्ण मार्ग, सरदार भगतसिंह मार्ग, चंद्रशेखर मार्ग में बने प्रतिष्ठानों में नहीं है पार्किंग। अतिक्रमण से मार्ग और संकीर्ण बन गए है। इन संकीर्ण मार्गों पर व्यापारियों और ग्राहकों के वाहन खड़े किए जा रहे हैं। इस कारण पैदल बाजार आ रहे लोगो को भी असुविधा हो रही है।
बैंकों में पार्किंग की हालात
शहर में चल रहे विभिन्न बैंकों में एक भी बैंक की अपनी पार्टी व्यवस्था नहीं है। बैंकों के काम से प्रतिदिन सैकड़ों लोग बैंकों में पहुंच रहे हैं। इससे बैंकों के बाहर वाहनों का जमावड़ा लग जाता है। वाहन बात करने के लिए बैंक द्वारा किसी कर्मचारी की ड्यूटी भी नहीं लगाई गई। इस कारण स्थिति बहुत ही गंभीर बन जाती है। सभी बैंक शहर के मुख्य गलियों में संचालित की जा रही है। राजवाड़े में दो बैंक आमने सामने संचालित की जा रही है। दस फीट चौड़ी सडक़ पर दोनों बैंक में आए लोग सडक़ के दोनों तरफ वाहन खड़े कर देते हैं। अंदर रहने वाले लोगो को पैदल चलने में भी असुविधा होती है। इसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। सीसीबी, एचडीएफ सी, बैंक ऑफ़ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, बीओबी, आईसीआईसीआई, एक्स्सि, विजया, बंधन, आईडीबीआई, स्टेटबैंक ऑफ़ इंदौर, पंजाब नेशनल बैंक, नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक, किसी में भी पार्किंग की सुविधा का ध्यान नहीं रखा गया। जहां जहां यह बैंक संचालित हो रही है उस इलाके के लोग बेतरतीब पार्किंग से परेशान है।
संकीर्ण गलियों में नहीं जा सकते सेवा वाहन
हुड़ा, कैलाश मार्ग, मरुतिनगर, कमला नेहरू मार्ग, एलआईसी कॉलोनी, रातीतलाई, अयोध्याबस्ती, हरिजन मोहल्ला, पॉवर हाउस रोड, भोजमार्ग और मुख्य बाजार में दुर्घटना होने पर फ ायर फ ़ाइटर , एम्बुलेंस, 108 , डायल 100 आदि नहीं पहुंच सकती। संकीर्ण गलियों पर बेतरतीब खड़े वाहन आवश्यकता पडऩे पर जरुरतमंद की राह का रोड़ा बन सकते हैं। इतनी विकट समस्याओं के बाद भी नगर में एक भी एकांकी मार्ग चिह्नि नहीं किया गया। यह यातायात विभाग की लापरवाही बताने के लिए पर्याप्त है।
कई बार बनीं योजनाएं
शहर की पार्किंग सही करने के लिए शहर वासियों ने कई बार मांग की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। आला अधिकारियों के साथए शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर हुई बैठकों में भी शहर की लचर पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता से लिया। इसमें वरिष्ठों ने कई सुझाव भी दिए। इनमें चाचा नेहरू बलोद्यान की खाली पड़ी जगह पर बाजारों में बेतरतीब खड़े वाहनों की पार्किंग तैयार करने की बात पर सहमति बनी थी, लेकिन वर्तमान में वहां असुविधाओं के बीच सब्जी मंडी संचालित की जा रही है। बाजार में बन रहे नए प्रतिष्ठानों के बेसमेंट में पार्किंग का सुझाव भी हवा हवाई हो गया। नगर निवेश एवं शहरी विकास प्राधिकरण के नियमों की अनदेखी से शहर की यातायात समस्या ने विराट रूप ले लिया।