
झालावाड़. Dopamine Addiction: कोरोना काल में ऑनलाइन क्लासेज के चलन से युवाओं में मोबाइल का उपयोग बढ़ा है, लेकिन साथ ही इसका अनावश्यक कार्यों के लिए दुरुपयोग भी बढ़ा है। इस कारण बहुत से बच्चे मोबाइल लत के शिकार हो गए हैं और मनोचिकित्सक के पास लत छुड़ाने के लिए पहुंचे रहे हैं। काउंसलिंग के दौरान पता चलता है कि उनका माइंड 'डोपामाइन एडिक्शन' का शिकार है। मोबाइल पर शॉर्ट कंटेंट देखने के कारण माइंड को हर 30 सैकण्ड में नया कंटेंट मिल रहा है तो उसे फास्ट डोपामाइन की आदत हो गई है। किसी भी चीज में लंबे समय तक मन नहीं लग रहा है। इस तरह कई लोग शिकार हो जाते हैं।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. शकील अंसारी का कहना है कि ओपीडी में रोज 4 से 5 मरीज इस समस्या को लेकर आते हैं। इनमें बच्चे भी शामिल है। अभिभावक बताते हैं कि जब मोबाइल के साथ रहता है तो अच्छा रहता है। जब मोबाइल छीन लो तो चिड़चिड़ा हो जाता है। गुस्सा करने लगता है। इसका कारण डोपामाइन एडिक्शन है, ये घातक है। यह एक तरह से नशे जैसा होता है। इससे लत लग जाती है। बच्चों को कम उम्र में मोबाइल देने से वे इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
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मोबाइल की उपलब्धता सहज है इसलिए तो लत पड़ रही बच्चों को
लत का सिद्धांत है कि जो आपको सामान्य से अधिक खुशनुमा होने का अहसास कराए, उसे पाने के लिए दिमाग बार-बार कोशिश करे। तम्बाकू का सेवन दिमाग में रिवॉर्ड सर्किट में डोपामाइन नामक न्यूरोकैमिकल को सामान्य स्तर से अधिक बढ़ाता है। उस कारण कुछ समय लगातार सेवन करने से दिमाग तम्बाकू पर निर्भर होने लगता है, फिर नशे की लत में तब्दील हो जाता है। उसी प्रकार मोबाइल में कुछ एप्लीकेशन्स, गेम्स, वेबसाइट्स ऐसी हैं, जो दिमाग में डोपामाइन का स्तर बढ़ाती हैं। जब डोपामाइन बढ़कर वापस कम होने लगता है तो व्यवहार में चिड़चिड़ापन, काम में मन नही लगना, कुछ भी करने की इच्छा नही होना और वापस डोपामाइन को बढ़ाने वाली चीजों की याद या तलब होने लगती है। चूंकि मोबाइल हमेशा पास में ही होता है। बच्चा उसे बार-बार लत की तरह काम में लेने लगता है। मोबाइल की उपलब्धता सहज है। इसकी लत आसानी से पड़ जाती है।
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डिजिटल फास्टिंग करने के तरीके
अपने मोबाइल से बिना काम के एप्लीकेशन हटा दें।
सप्ताह में एक दिन मोबाइल से दूरी बनाएं।
सोने से दो घंटे पहले ही मोबाइल देखना बंद कर दें।
डिजिटल अखबार या किताबें पढ़ने के बजाय फिजिकल पढ़ें।
शॉर्ट कंटेट देखना कम करें।
स्क्रीन टाइम के लिए शेड्यूल बनाएं।
मोबाइल की लत के लक्षण
लंबे समय तक किसी भी बात में मन नहीं लगना।
बार-बार मूड बदलना।
बार-बार मोबाइल चेक करना।
ध्यान की कमी।
शॉर्ट कंटेंट की ओर ज्यादा आकर्षित होना।
चिड़चिड़ापन, बेवजह गुस्सा।