झालावाड़ में ऑपरेशन शटरडाउन के तहत साइबर फ्रॉड गिरोह को इंटरनेट सपोर्ट देने वाले 3 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीएम किसान सहित सरकारी योजनाओं के पोर्टल हैक कर फर्जी लाभार्थी जोड़ करोड़ों की हेराफेरी की गई थी।
झालावाड़: राजस्थान के झालावाड़ जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे 'ऑपरेशन शटरडाउन' के तहत पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए इस संगठित गिरोह को इंटरनेट एक्सेस और तकनीकी सहायता प्रदान करने वाले तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस बड़ी कार्रवाई के साथ ही अब तक इस मामले में गिरफ्तार होने वाले अभियुक्तों की कुल संख्या 51 हो गई है। झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 'आशिक अली' नामक व्यक्ति के विरुद्ध मिली एक छोटी सी शिकायत से हुई थी, जिसमें सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।
बता दें कि जब पुलिस ने इसकी गहराई से जांच की, तो देश में पहली बार संगठित रूप से हो रहे एक ऐसे विशाल साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ, जिसने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) को निशाना बनाया था।
जांच में सामने आया कि गिरोह के मुख्य सरगना रामाअवतार सैनी और मास्टरमाइंड विक्रम सैनी ने सॉफ्टवेयर के माध्यम से तहसील, जिला और राज्य स्तर के नोडल अधिकारियों की सरकारी आईडी के पासवर्ड ब्रेक किए।
इन्होंने ओटीपी (OTP) को बाइपास कर सिस्टम में लॉगिन किया और 'लैंड सीडिंग' के जरिए हजारों अपात्र लोगों को पात्र लाभार्थियों की सूची में जोड़ दिया। इस फर्जीवाड़े के माध्यम से सरकारी राजकोष से करोड़ों रुपए की राशि का गबन किया गया।
हालिया कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह को इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध कराने वाले तीन अभियुक्तों को दौसा जिले से गिरफ्तार किया है। नीरज कुमार (25 वर्ष), निवासी बांदीकुई, दौसा। जितेंद्र कुमार (25 वर्ष), निवासी मानपुर, दौसा और विष्णु कुमार (23 वर्ष), निवासी सिकंदरा, दौसा।
इन आरोपियों के पास से अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी गिरोह को तकनीकी बैकअप और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद कर रहे थे। फिलहाल, तीनों आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर हैं।
कुल गिरफ्तारी: सरगना और मास्टरमाइंड सहित 51 आरोपी।
वित्तीय कार्रवाई: करोड़ों रुपए की राशि और हजारों फर्जी बैंक खाते फ्रीज।
न्यायिक स्थिति: 48 आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
मामले की गंभीरता और इसके अंतर्राज्यीय नेटवर्क को देखते हुए, पुलिस महानिदेशक (DGP) राजस्थान ने झालावाड़ पुलिस के अनुरोध पर इस केस की आगे की जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को स्थानांतरित कर दी है।
इस सफल ऑपरेशन में झालावाड़ की साइबर कंट्रोल रूम टीम, थाना खानपुर, थाना सुनेल और दौसा पुलिस की जिला स्पेशल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम के साइबर विशेषज्ञों रवि सेन, सुमित कुमार और अन्य सदस्यों की तकनीकी दक्षता की विशेष रूप से सराहना की है।