जिले में सहकारी समितियों में कई तरह की गड़बडियां सामने आ रही है, इसके बाद भी जिम्मेदार कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
Jhalawar Central Cooperative Bank News सहकारी बैंक के भ्रष्टाचार के दो बड़े मामलों में जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, लेकिन एक महीने बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
राजस्थान पत्रिका ने पैक्स किसानों को डबल ऋण वितरण एवं उसकी वसूली न करने का मामला उजागर किया था, जिसमें 25 लाख से अधिक का गबन सामने आया था। जांच में एक अधिकारी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक देवप्रकाश दोषी पाए गए, जिन पर एफआईआर और वसूली के आदेश किए गए।
कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित कर 10 ट्रैक्टर खरीद में भ्रष्टाचार का मामला भी राजस्थान पत्रिका ने 8 मई 2025 को “ट्रैक्टर का एक जैसा मॉडल ओर पावर, फिर भी दरों में भारी अंतर, खरीद पर उठे सवाल” शीर्षक से प्रमुखता से उजागर किया था। इसमें भी कर्मचारियों को दोषी पाया गया। तत्कालीन प्रबंध निदेशक को समिति अध्यक्ष होने के नाते जिम्मेदार ठहराया गया।
जांच में सामने आया कि समिति से खाली प्रस्ताव लेकर ट्रैक्टर डीलर से सभी डील पर्यवेक्षक एवं निरीक्षण शाखा के तत्कालीन प्रबंधक की ओर से की गई। देवप्रकाश और ट्रैक्टर डीलर की सांठगांठ की गहन जांच व कृषि उपकरणों के भौतिक सत्यापन के आदेश भी दिए गए हैं।
दोनों प्रकरणों में एक ही व्यक्ति का नाम आने के बावजूद समान कार्यवाही नहीं हुई। आदेश के एक महीने बाद भी राशि वसूली और एफआईआर नहीं हुई। एक व्यवस्थापक की मृत्यु से मामला मृतक पर दोषारोपित होने की संभावना है।
कोल्वी सहकारी समिति की जमीन भू-माफियाओं को बेचने का एक और मामला लंबित है, जिसमें भी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध है। रजिस्ट्रार एवं संयुक्त शासन सचिव समित शर्मा की नियुक्ति से तीनों प्रकरणों की जांच जल्द एवं ईमानदारी से होने की उम्मीदें प्रबल हुई हैं। लेकिन अब यह देखना है कि अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कोटा के आदेश का क्या असर होता है।
बड़ोदिया ग्राम सेवा सहकारी समिति में डबल ऋण वितरण मामले की जांच दिसंबर 2025 में पूर्ण हो चुकी थी। उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां ने जांच कर 3 दिसंबर को आदेश दिए, जिसमें बताया कि 31 मार्च 2025 को बकाया राशि 25 लाख 95 हजार के दुरुपयोग में समिति व्यवस्थापक व तत्कालीन शाखा प्रबंधक को संयुक्त रूप से उत्तरदायी माना गया था।
उप रजिस्ट्रार ने इनके विरुद्ध राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम-2013 की धारा 57 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर वसूली की कार्रवाई के आदेश दिए थे। प्रबंधक निदेशक ने फिर 5 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी कर जांच परिणाम में दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। जांच में सामने आया कि समिति से खाली प्रस्ताव लेकर ट्रैक्टर डीलर से सभी डील पर्यवेक्षक एवं निरीक्षण शाखा के तत्कालीन प्रबंधक की ओर से की गई। देवप्रकाश और ट्रैक्टर डीलर की सांठगांठ की गहन जांच व कृषि उपकरणों के भौतिक सत्यापन के आदेश भी दिए गए हैं।
ग्राम सेवा सहकारी समितियों में अनियमितता की जांच के बाद भी अगर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है तो इसे दिखवाकर कार्रवाई करेंगे।
ओमप्रकाश जैन, प्रबन्ध निदेशक,झालावाड़ केन्द्रीय सहकारी बैंक, झालावाड़।