. अतिवृष्टि के बाद जहरीले जीव-जन्तु के काटने की घटनाएं बढ़ी. किसानों को अधिक सावधानी रखने की जरूरत
झालावाड़. जिले में बाढ़ व अतिवृष्टि के बाद जहरीले जीव जन्तुओं के काटने की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। पिछले सात दिन से रोजाना सर्प दंश से एक की मौत हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश व अतिवृष्टि से बिलों में पानी भर गया है। इस कारण वह बिलों से बाहर आ रहे हैं। इस कारण सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई है। इसलिए सतर्कता बहुत जरूरी है। पिछले पांच दिन में सर्पदंश से सात लोगों की अकाल मौत हो गई है। सुनेल में बुधवार को फिर सर्प दंश से एक की मौत हो गई। पिछले एक माह में सबसे अधिक सर्पदंश के मामले सुनेल क्षेत्र से आए हैं।
बरसात का पानी खेतों, और बिलों में भर जाता है इसके कारण इन बिलों में रहने वाले जहरीले जीव सूखे स्थानों की तरफ भागते हैं और अक्सर रिहायशी इलाको में घर और मकान के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इन परिस्थितियों में उनका सामना मनुष्य और पशुओं से होता है और अपने ऊपर खतरा महसूस होते ही यह जहरीले जानवर हमलावर होते हैं। कई बार खेतों में कृषि कार्य के दौरान भी जहरीलें जीवों के काटने की घटनाएं हो जाती है। झालावाड़ जिले में पिछले तीन सालों में सांपों के काटने के करीब 474 मामले सामने आ चुके है। जिनमें करीब 17 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में अभी 15 अगस्त तक 62 लोगों को सांप ने काटा है। हालांकि हर सांप जहरीला नहीं होता है, ऐसे मेें घबराने की बजाए सीधे नजदीकी हॉस्पिटल पहुंचे ताकि समय से इलाज शुरू हो सके।
खतरा महसूस होने पर काटते हैं
अक्सर ऐसा देखा गया है कि शहरी इलाकों की जगह ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने की घटनाएं सर्वाधिक रूप से सामने आ रही है। बरसात के दिनों में जैसे ही खेत में पानी भरता है वैसे ही यह जहरीले जानवर सूखे स्थानों में गांव में रहने वाले लोगों के घरों में पनाह ढूंढते हैं। और जरा सी चूक होने या खुद पर खतरा महसूस होते ही यह हमला कर देते हैं।
ऐसे में सांप के काटे गए व्यक्ति को घटना के बाद तत्काल अस्पताल पहुंचाएं इस दौरान किसी भी सूरत में उसे सोने नहीं देना चाहिए। क्योंकि अगर वह व्यक्ति सो गया तो ऐसे में जहर तेजी से शरीर में फैलेगा और इलाज मुहैया होने से पहले व्यक्ति की जान जाने का खतरा रहता है।
सांप काटने की घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उस व्यक्ति को चिकित्सीय परामर्श और इलाज उपलब्ध कराने की जगह झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं, काटने वाला सांप जहरीला था या नहीं इस सवाल के जवाब को ढूंढने में लोग अपना समय व्यर्थ करते हैं। जबकि ऐसा नहीं करके सांप के काटे हुए व्यक्ति को सीधे चिकित्सालय लेकर जाना चाहिए। देरी के कारण सांप का जहर कुछ ही देर में मनुष्य के नर्वस सिस्टम को अपनी गिरफ्त में ले लेता है और उस व्यक्ति की जान जा सकती है , इसलिए अगर सांप ने काटा हो तो बिना समय गंवाए तत्काल चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.रघुनन्दन मीणा ने बताया बारिश के दिनों में बिलो में पानी भरने से सांप व अन्य जहरीले जीव बाहर आ जाते हैं। ऐसे में खेतों में कार्य करते समय किसानों को लंबे जूते पहनने चाहिए। बारिश के दिनों में जमीन पर सोने से बचे। किसी भी व्यक्ति को सांप व अन्य जीव काट लें तो तुरंत निकट चिकित्सालय में लेकर जाएं। सांप के काटे व्यक्ति को वंटीवैनम इंजेक्शन दिए जाते हैं। जिले में कोबरा, करेत, वायपर तीन प्रजाति के सांप के काटे हुए केस आते हैं। ऐसे में बारिश के दिनों में कबाड़ व ईंट व पेड़ पौधों के वाले स्थानों पर सावधानी से जाना चाहिए तथा सामान देखकर व रात के समय पर्याप्त रोशन में ही उठाना चाहिए।