
झुंझुनूं/पचलंगी। खेतों में सर्दी का सितम जारी है। फसलों पर बर्फ की सफेद परत जम रही है। इस कारण गेहूं की फसल को छोड़कर सभी फसलों में नुकसान हो रहा है। फल व सब्जी सहित अन्य उद्यानिकी फसलों में नुकसान की ज्यादा आशंका बनी है। कृषि पर्यवेक्षक पचलंगी पूरण प्रकाश यादव ने बताया कि टमाटर, बैंगन, आलू व मटर में पाले का असर अधिक होता है।
सहायक निदेशक उद्यान शीशराम जाखड़ ने बताया कि झुंझुनूं जिले में मटर 275 हेक्टेयर, टमाटर 75 हेक्टेयर, व आलू की 25 हेक्टेयर में बुवाई है। पिछले 5-7 दिन से चल रही शीतलहर व पाले के कारण इन सभी फसलों में 15 से 25 प्रतिशत नुकसान होने की आशंका है। वहीं किसान अर्जुन लाल रोहिलाण पचलंगी अनूप सिंह शेखावत मणकसास, सीताराम सैनी जगदीशपुरा सहित अन्य का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र व काटली के बहाव क्षेत्र में बैंगन की फसल 70 से 75 प्रतिशत नष्ट हो गई । किसानों का कहना है कि टमाटर व अन्य फल व सब्जियों की फसलों को बचाने की जुगत की जा रही है।
यह है पाले व सर्दी के प्रभाव
सहायक कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार उदयपुरवाटी, कृषि प्रवेक्षक पचलंगी पूरण प्रकाश यादव, प्रहलाद जांगिड़ कृषि प्रवेक्षक ने जानकारी दी कि फसलों में सर्दी व पाले का असर होने पर पौधे के बहार व अन्दर की कौशिकाओं में बर्फ जम जाती है। जिससे पौधा सूख जाता है या नष्ट हो जाता है। फलदार वृक्षों में सबसे ज्यादा प्रभाव पपीते पर व सब्जियों में टमाटर बैंगन, मिर्च, आलू व मटर पर अधिक रहता है। वहीं खाद्यान फसलों में जौ, चना, सरसों व जीरा पर पड़ता है।
यह है उपाय
कृषि प्रवेक्षक पचलंगी पूरण प्रकाश यादव ने बताया कि जिस रात पाला पड़ने की संभवाना हो उस रात किसानों को खेत की उत्तरी-पश्चिमी दिशा में मेड़ों पर कुड़ा कचरा जला कर धुंआ करना चाहिए। इस विधि से लगभग 4 डिग्री सेल्सियस तापमान आसानी से बढ़ाया जा सकता है। कृषि पर्यवेक्षक यादव ने बताया कि सब्जियों को पाले से बचाने के लिए लो- टनल का प्रयोग करें। पाला पडऩे की संभावना हो तो सायंकाल खेत की सिंचाई करें। इससे नमीयुक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है। जिन दिनों में पाला पड़ने की संभवाना हो गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत का फसलों पर छिड़काव करें। कृषि प्रवेक्षक यादव ने जानकारी दी कि लम्बे समय तक पाले से बचान के लिए फसलों के खेतकी उत्तरी पश्चिमी मेड़ों पर तथा बीच - बीच में वायु अवरोधक पेड़ जैसे खेजड़ी, बबूल, शीशम व जामुन लगाएं। इससे ठण्डी हवाओं से फसलों को बचाया जा सके।