झुंझुनू

‘टूटी सड़क पर रोज-रोज मरने से अच्छा है आत्महत्या कर लूं’

'कलक्टर साहब, ऐसी सड़क पर रोज-रोज मरने के बजाय तो अच्छा है एक दिन में मर जाऊं।'
less than 1 minute read
• •
Updated: 31 Jan 2023, 5:23 PM IST
divyang_1.jpg

बुहाना (झुंझुनूं)। 'कलक्टर साहब, ऐसी सड़क पर रोज-रोज मरने के बजाय तो अच्छा है एक दिन में मर जाऊं।' एक दिव्यांग ने जिला कलक्टर को पत्र सौंप कर यह चेतावनी दी है। वह पिछले चार साल भालोठ-पचेरीकलां सड़क को ठीक करवाने के लिए संघर्ष कर रहा है। अब उसने सड़क को ठीक करवाने के लिए प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है।

दरअसल भालोठ-पचेरीकलां सड़क की हालत काफी समय से खराब है। सड़क से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं मगर कोई सुध नही लेना चाहता। रायपुर अहीरान निवासी दिव्यांग कुलदीप कुमार इस खस्ताहाल सड़क से काफी परेशान हैं। वह 2018 से सड़क की हालत सुधरवाने को लेकर संघर्षरत हैं। वह प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित व मौखिक में शिकायत कर चुके हैं।

अंतर्राष्टीय दिव्यांग दिवस और गणतंत्र दिवस पर धरना भी दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुलदीप ने सोमवार को जिला कलक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उसने लिखा है कि सात दिन में उक्त सड़क निर्माण की स्वीकृति नहीं करवाई गई तो वह अपने आप को आत्मघात कर लेगा। उसने लिखा है कि सड़क को लेकर उसने राजस्थान पोर्टल पर शिकायत की। कलक्टर की जनसुनवाई में भी यह पीड़ा बताई गई। डाक के माध्यम से भी कई बार समस्या बताई गई लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।

Published on: