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‘मां को मत बताना…’ सुनकर नम हुई आंखें; 3 बारातियों की जिंदा जलकर मौत, एक कमरे में हुई शादी की रस्म

पिलानी-सादुलपुर मार्ग पर थिरपाली छोटी और थिरपाली बड़ी के बीच गुरुवार देर रात हुआ दर्दनाक हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि खुशियों के मातम में बदल जाने की भयावह कहानी बन गया। बोलेरो और डंपर की आमने-सामने भिड़ंत के बाद लगी आग में तीन लोग जिंदा जल गए, जबकि कई बाराती गंभीर रूप से झुलस गए।

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पिलानी-सादुलपुर मार्ग पर हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत (पत्रिका फोटो)

पिलानी (झुंझुनूं): पिलानी कस्बे में गुरुवार रात एक ओर जहां हिमांशी पुत्री सुनील भार्गव की शादी की खुशियां चल रही थीं। वहीं, थिरपाली गांव के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे माहौल को मातम में बदल दिया।

पिलानी से करीब एक किलोमीटर पहले हुए इस हादसे में जीप और डंपर की आमने-सामने भिड़ंत के बाद तीन बाराती जिंदा जल गए, जबकि दूल्हे का भाई विकास पुत्र ओमप्रकाश निवासी सिद्धमुख, पंकज पुत्र रोहिताश निवासी मंदिरपुरा (नोहर), आशीष पुत्र सत्यवीर कुम्हार निवासी सरसोद (हिसार) सहित दो अन्य बाराती गंभीर रूप से झुलस गए।

दूल्हा पहुंच चुका था, कमरे में हुई शादी की रस्म

दूल्हा परिवार के साथ पहले ही पिलानी पहुंच चुका था। हादसे की जानकारी दूल्हे के मामा के बेटे को लगी तो वह तुरंत अस्पताल पहुंचा। उस समय विवाह स्थल पर ‘कोरथ’ की रस्म चल रही थी।

बाद में जब परिवार को हादसे की सूचना दी गई तो माहौल गमगीन हो गया। हालात को देखते हुए एक कमरे में ही दूल्हा-दुल्हन ने वरमाला पहनाकर शादी की औपचारिकता पूरी की।

‘मां को मत बताना…’ सुनकर भर आई आंखें

झुलसे बारातियों को जब पिलानी के बिरला सार्वजनिक अस्पताल लाया गया तो वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था। कोई पानी मांग रहा था, तो कोई दर्द से तड़पते हुए मदद की गुहार लगा रहा था। एक घायल बार-बार कह रहा था ‘मां को मत बताना…’, जिसे सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

एक अन्य युवक छटपटाते हुए कह रहा था ‘मेरे आग लगी है…पानी पिला दो…’ एक घायल ने नर्स से दर्द कम करने के लिए इंजेक्शन लगाने की गुहार लगाई। हर तरफ दर्द और बेबसी का माहौल था।

अस्पताल में मची अफरा-तफरी

घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस घायलों को लेकर अस्पताल पहुंची। कुछ ही देर में परिजन भी वहां पहुंच गए। अपनों की हालत देखकर उनका धैर्य टूट गया। घायल पंकज के पिता का विलाप ‘सब कुछ लूट गया…’ सुनकर माहौल और भी गमगीन हो गया।

डॉक्टर-नर्सें जुटीं, हर ओर से उठ रही पुकार

अस्पताल प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। डॉक्टर और नर्सें लगातार घायलों के उपचार में जुटी रहीं, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि एक का इलाज करते ही दूसरा घायल पुकार उठता ‘मेरा भी इलाज करो…’ चीख-पुकार से पूरा अस्पताल गूंज उठा। प्राथमिक उपचार के बाद पांचों घायलों को झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल रैफर किया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।