झुंझुनू

धूम्रपान करने वालों में ग्रामीण ज्यादा, गुटखा खाने में शहरी आगे, हर साल खर्च कर रहे 715 करोड़

जिले में हर साल लगभग 715 करोड़ करोड़ रुपए जर्दा- गुटखा खाने व धूम्रपान करने में खर्च किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा चौंकाने के साथ आंख खोलने वाला भी है। यह राशि ना केवल आर्थिक भार बढ़ा रही है, बल्कि इतनी बड़ी मात्रा में धूम्रपान करने व जर्दा गुटखा खाने से लोग बीमार भी ज्यादा हो रहे हैं।
2 min read
Jun 01, 2023
tabacco

झुंझुनूं. जिले में हर साल लगभग 715 करोड़ करोड़ रुपए जर्दा- गुटखा खाने व धूम्रपान करने में खर्च किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा चौंकाने के साथ आंख खोलने वाला भी है। यह राशि ना केवल आर्थिक भार बढ़ा रही है, बल्कि इतनी बड़ी मात्रा में धूम्रपान करने व जर्दा गुटखा खाने से लोग बीमार भी ज्यादा हो रहे हैं। वे शारीरिक रूप से कमजोर भी हो रहे हैं। शिक्षित रोजगार केन्द्र प्रबंध समिति के सर्वे के अनुसार धूम्रपान करने वालों में ग्रामीणों की संख्या ज्यादा है। शहरों में जहां इनकी संख्या 4.3 प्रतिशत है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में धूम्रपान करने वालों की संख्या 13.6 प्रतिशत है। वहीं गुटखा व जर्दा खाने वालों में शहरी लोगों की संख्या 15.2 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्र में इनकी संख्या लगभग 13.7 प्रतिशत है।

सत्रह प्रतिशत से ज्यादा लोग कर उपयोग
चाहे सिगरेट का पैकेट हो, बीडी का हो, तम्बाकू का हो या गुटखे का। हर पैकेट के बड़े हिस्से पर इनके खाने के नुकसान बताए जा रहे हैं। फोटो भी प्रकाशित की जा रही है। लेकिन फिर भी खाने वालों की संख्या में ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा। सर्वे के अनुसार झुंझुनूं जिले में सत्रह प्रतिशत से ज्यादा लोग धूम्रपान करते हैं। कोई चोरी छिपे कर रहा है तो कोई सबके सामने।

यह भी पढ़ें :शिक्षा अधिकार मामले में बड़ी कार्रवाई, 15 दिन में जानकारी नहीं तो जुर्माना

गुटखा, पान मसाला सहित तम्बाकू के उत्पाद ही ऐसे नशीले व कैंसर पैदा करने (कार्सिनोजेनिक) वाले पदार्थ हैं, जो आसान से किसी भी नुक्कड़- चौराहे की दुकान पर मिल जाते हैं। यहां तक कि नाबालिगों को भी तम्बाकू उत्पाद थमा दिए जाते हैं। ऐसे में इन उत्पादों को पूर्णतया बंद करना चाहिए।
राजन चौधरी, समन्वयक, राजस्थान टबैको फ्री अलाइअन्स

Updated on:
01 Jun 2023 12:02 pm
Published on:
01 Jun 2023 12:02 pm