
Jhunjhunu Jatin Soni Murder Case: सात साल पहले माननगर में चली एक गोली ने सिर्फ ज्वैलर जतिन सोनी की जिंदगी नहीं छीनी थी, बल्कि पूरे परिवार को ऐसा जख्म दे दिया था, जिसकी टीस आज भी कायम है। शोरूम में लाखों रुपए के आभूषण लूटने आए बदमाशों ने जतिन को गोली मारी। परिवार उसे बचाने के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल तक दौड़ा। इलाज में लाखों रुपए खर्च हुए, लेकिन 25 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 9 अक्टूबर 2019 को जतिन ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत का सदमा पिता चंद्रप्रकाश सोनी भी नहीं सह सके।
हत्याकांड के बाद परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि कुछ ही दिनों में पिता ने भी दुनिया छोड़ दी। अब इसी बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला आया है। अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2, झुंझुनूं, कालूराम ने बुधवार को डकैती और हत्या के मामले में पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। वहीं आरोपी प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
वारदात 15 सितंबर 2019 की है। माननगर में स्काईलाइन अस्पताल के पास जतिन सोनी की ज्वैलरी की दुकान थी। दोपहर करीब ढाई बजे हथियारबंद बदमाश दुकान में घुसे। एक मोटरसाइकिल पर हेलमेट लगाकर आया था, जबकि दो सफेद रंग की बोलेरो से पहुंचे थे। तीनों के पास पिस्टल थी। बदमाशों ने दुकान में घुसते ही जतिन पर पिस्टल तान दी और जान से मारने की धमकी देते हुए आभूषण बैग में भरने को कहा।
जतिन के गले से चेन उतरवाई गई। सीसीटीवी की डीवीआर भी मांगी गई। दुकान में मौजूद कर्मचारी को भी धमकाया गया। बताया गया कि वारदात के दौरान एक बदमाश ने जतिन को अपनी पहचान बताते हुए कहा था कि पुलिस को बता देना, योगेश आया था। इसके बाद लाखों रुपए के आभूषण समेटकर बदमाश वहां से निकलने लगे।
जतिन ने मौका देखकर दुकान का शीशा खोला और जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश की। बदमाश ने उनका पीछा किया और गोली चला दी। गोली लगने से जतिन सड़क पर गिर पड़े। परिजन उन्हें उपचार के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले गए। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद जतिन वापस घर लौटेंगे। लेकिन करीब 25 दिन तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद 9 अक्टूबर 2019 को उनकी मौत हो गई। एक परिवार का बेटा, भाई और सहारा हमेशा के लिए चला गया।
जतिन की मौत के बाद परिवार सदमे में चला गया। पिता चंद्रप्रकाश सोनी बेटे की मौत से गहरे तनाव में थे। परिजनों के अनुसार, बेटे के इलाज में लाखों रुपए खर्च हो चुके थे और हत्याकांड की पीड़ा अलग थी। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद जब कुछ आरोपियों को जमानत मिली तो परिवार की चिंता और बढ़ गई।
चंद्रप्रकाश बेटे की मौत का सदमा भीतर ही भीतर झेलते रहे। आखिरकार उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी भी मौत हो गई। इस तरह एक ही वारदात ने परिवार से बेटा और पिता दोनों छीन लिए।
राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक नंदकिशोर शर्मा ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 39 गवाहों के बयान करवाए गए और 210 दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। अभियोजन ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोपियों को कठोर सजा देने की मांग की।
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद नरवाणा रोड, शीतलपुरी कॉलोनी, जींद निवासी दीपक पहल पुत्र जगतसिंह, चारणवासी निवासी योगेश कुमार पुत्र भागुराम, जागसी, बरोदा, सोनीपत निवासी विनोद कुमार पुत्र सुबेसिंह, आबूसर निवासी अंकित कुमार उर्फ मीठू पुत्र प्रमोद कुमार और चुड़ैला का बास निवासी प्रताप सिंह पुत्र रिद्धलाल को दोषी माना।
पांचों को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई, जो साथ-साथ चलेंगी। वहीं चारणवासी निवासी प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया पुत्र फूलचंद को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
जांच में पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। इनमें अंकित कुमार उर्फ मीठू, प्रताप सिंह, प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया, दीपक पहल, योगेश चारणवासी और विनोद कुमार शामिल थे। पुलिस ने वारदात के मास्टरमाइंड योगेश चारणवासी को करीब पांच माह बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, वह गुजरात में छिपा हुआ था और बाद में उसे बीकानेर से पकड़ा गया।
अदालत के फैसले से कानूनी लड़ाई का एक अहम पड़ाव पूरा हुआ है। लेकिन सोनी परिवार के लिए वह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता। जिस घर में कभी जतिन की आवाज गूंजती थी, वहां अब उसकी यादें हैं। फैसले ने इंसाफ की उम्मीद को मजबूती दी, लेकिन उस बेटे को वापस नहीं ला सकता, जिसके लिए परिवार ने पहले अस्पताल के चक्कर काटे और फिर न्यायालय की लंबी लड़ाई लड़ी।
जतिन सोनी की मौत के बाद अचानक क्षेत्र के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। शव आने से पहले ही लोगों ने रोड नंबर तीन पर जाम लगा दिया। जिले के कई कस्बों में बाजार बंद भी रखे गए थे।