झुंझुनू

खाटूधाम पदयात्रा 2026: 150 KM नंगे पैर, सिर पर दहकती सिगड़ी…विदेशों से भी आते हैं श्याम भक्त, जानें मान्यता

Khatu Shyam Falgun Mela : फाल्गुन के महीने में श्याम भक्तों में आस्था का सैलाब देखने का मिलता है। झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ कस्बे से भी हर साल हजारों श्रद्धालु पैदल ही खाटूधाम तक जाते हैं। इनमें सैकड़ों महिला श्रद्धालु सिर पर जलती हुई सिगड़ी लेकर चलती हैं।
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Feb 09, 2026
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सिर पर जलती सिगड़ी रखकर पदयात्रा में शामिल महिलाएं। फोटो पत्रिका

झुंझुनूं। फाल्गुन के महीने में श्याम भक्तों में आस्था का सैलाब देखने का मिलता है। झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ कस्बे से भी हर साल हजारों श्रद्धालु पैदल ही खाटूधाम तक जाते हैं। इनमें सैकड़ों महिला श्रद्धालु सिर पर जलती हुई सिगड़ी लेकर चलती हैं। खास बात यह है कि कई श्रद्धालु पैदल जाते हैं और पैदल ही वापस लौटते हैं। इस निशान यात्रा में नेपाल, इटली, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका, इराक, इरान से भी कई प्रवासी शामिल होते हैं। कोलकाता से करीब 400 श्रद्धालु शामिल होते हैं।

शिखर पर चढ़ाया जाता है सूरजगढ़ का निशान

बाबा श्याम के मंदिर के मुख्य शिखर पर सूरजगढ़ का सफेद निशान ही चढ़ाया जाता है। पूरे वर्ष मंदिर पर यही ध्वज लहराता है। जिसके साथ ही लक्खी मेले का विधिवत समापन होता है।

इस बार 23 को रवाना होगी निशान पदयात्रा

सूरजगढ़ के प्राचीन श्याम मंदिर से खाटूधाम के लिए निशान पदयात्रा 23 फरवरी को रवाना होगी। मंदिर ट्रस्ट के महंत मनोहरलाल इंदौरिया ने बताया कि 18 फरवरी को निशान स्थापना की जाएगी।

नंगे पैर चलते हैं श्रद्धालु

पदयात्रा में श्रद्धालु करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। सिगड़ी में दहकते हुए अंगारे रखे जाते हैं, जिन पर लगातार गुग्गल और धूप डाली जाती है। भक्त नंगे पैर चलते हैं और कड़कड़ाती धूप या धूल की परवाह किए पदयात्रा में इस जलती सिगड़ी को संतुलित रखते हैं। यात्रा के अंत में खाटूधाम में सिगड़ी और निशान बाबा के दरबार में अर्पित किए जाते हैं।

यह है मान्यता

मान्यता है कि जिनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है, वह सिर पर सिगड़ी लेकर खाटूधाम जाती हैं और वहां धोक लगाकर सिगड़ी बाबा के दरबार में अर्पित की जाती है। यात्रा में हर साल सैकड़ों महिलाएं शामिल होती हैं। महिलाओं का कहना है कि जो भी बाबा श्याम से मांगतीं हैं वो उन्हें मिलता है।

मोर पंख से खोल दिया था खाटूधाम का ताला

महंत ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में बाबा श्याम के दरबार में आस्था के सैलाब को देखकर अंग्रेजी हुकूमत ने खाटू मंदिर में ताला लगा दिया था। तब एक भक्त मंगलाराम निशान लेकर खाटू पहुंचे। उन्होंने अपने गुरु गोर्धनदास का आदेश पाकर बाबा श्याम का नाम लिया और मोर पंख ताले पर मारा तो ताला खुल गया। यह चमत्कार देख अंग्रेजी हुकूमत ने पैर पीछे कर लिए।

Updated on:
09 Feb 2026 03:27 pm
Published on:
09 Feb 2026 03:26 pm
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