झुंझुनू

Viral Wedding Card: ‘घणी-घणी मनवार…’, राजस्थान के इस अनोखे शादी के कार्ड की बढ़ी डिमांड, देखते ही लोगों को आ रहा पसंद

Wedding Invitation Card-Kuku Patri: झुंझुनूं में प्रिंटिंग प्रेस संचालक आर्यन शर्मा बताते हैं कि अब राजस्थानी भाषा में शादी के कार्ड छपवाने का चलन धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। पहले गिने-चुने लोग ही मायड़ बोली में ‘कुंकुं पतरी’ छपवाने आते थे, लेकिन अब मांग साफ तौर पर बढ़ी है।

2 min read
Apr 22, 2026
कार्ड की फोटो: पत्रिका

Unique Wedding Card: ‘मायड़ भाषा लाडली, जन-जन कंठाहार…’ अब ये पंक्तियां सिर्फ गीतों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि शादी-ब्याह के निमंत्रणों में भी गूंजने लगी हैं। शेखावाटी की मिट्टी से जुड़ी यह मिठास अब ‘कुंकुं पतरी’ के रूप में हर घर तक पहुंच रही है।

आधुनिकता के दौर में जहां अंग्रेजी और हिंदी के वेडिंग कार्ड्स आम हो गए थे, वहीं झुंझुनूं के लोग अब अपनी जड़ों की ओर लौटते दिख रहे हैं। यहां शादी के निमंत्रण अब ‘शुभ विवाह’ के साथ-साथ ‘थारे आवण सूं म्हारो आंगणो महक उठसी’ जैसे आत्मीय शब्दों से सजे नजर आते हैं। यह केवल बुलावा नहीं, बल्कि अपनत्व का एहसास है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan News: नागौर के बाद अब दौसा का मायरा आया चर्चा में, दुल्हन के पिता का 13 साल पहले हो गया था निधन
कार्ड की फोटो: पत्रिका

राजस्थान भाषा ने मान्यता देओ जी…

‘घणां हरख रै साथे स्यूं अरदास है कै म्हारे लाडेसर रा ब्याव में…, इण घणा कोड अर उच्छव में आप सगळा परिवार साथै पधारणै री हेत भरी अरदास है…’ जैसी पंक्तियां कुंकुं पतरी में लिखी जा रही है जो लोगों के दिलों को छू रही हैं। कई निमंत्रण पत्रों में ‘पैली राजस्थानी भाषा ने मान्यता देओ जी…’ जैसे वाक्य छापकर सरकार से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी उठाई जा रही है।

कार्ड नहीं, संस्कृति की पहचान

स्थानीय लोग मानते हैं कि शादी का कार्ड महज सूचना नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक सहेजकर रखी जाने वाली धरोहर है। राजस्थानी में छपी ‘कुंकुं पतरी’ न केवल अलग पहचान बनाती है, बल्कि उसे देखने वाला हर व्यक्ति उसे संभालकर रखना चाहता है। वरिष्ठ साहित्यकार नागराज शर्मा व भागीरथ सिंह भाग्य का कहना है कि ‘पधारो म्हारे देस’ जैसे शब्दों में जो आत्मीयता है, वह किसी अन्य भाषा में संभव नहीं। यही कारण है कि अब लोग औपचारिकता से ज्यादा सगापन चुन रहे हैं।

निमंत्रण में छिपा बड़ा संदेश

इन कार्डों में सिर्फ शादी का न्यौता नहीं, बल्कि एक आंदोलन की झलक भी है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग लंबे समय से चल रही है। ऐसे में हर ‘कुंकुं पतरी’ एक संदेश बनकर सामने आ रही है कि भाषा केवल बोलने की चीज नहीं, बल्कि पहचान है।

बच्चों में भी बढ़ी उत्सुकता

इन निमंत्रण पत्रों का असर नई पीढ़ी पर भी साफ दिख रहा है। कार्ड में लिखे शब्दों को लेकर बच्चे जिज्ञासु हो रहे हैं, वे उनके अर्थ बुजुर्गों से पूछते हैं, इंटरनेट पर खोजते हैं और खुद भी उन्हें बोलने की कोशिश करते हैं। इस तरह एक साधारण सा शादी का कार्ड, भाषा सीखने का जरिया बन रहा है।

प्रिंटिंग प्रेस में बढ़ी मांग

झुंझुनूं में प्रिंटिंग प्रेस संचालक आर्यन शर्मा बताते हैं कि अब राजस्थानी भाषा में शादी के कार्ड छपवाने का चलन धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। पहले गिने-चुने लोग ही मायड़ बोली में ‘कुंकुं पतरी’ छपवाने आते थे, लेकिन अब मांग साफ तौर पर बढ़ी है। बड़े सावे के दौरान तो 10 से 15 कार्ड राजस्थानी भाषा में छपने लगे हैं। कई लोग कार्ड की सामग्री खुद तैयार कर लाते हैं, जबकि कुछ परिवार पूरी डिजाइन और भाषा का जिम्मा प्रेस पर ही छोड़ रहे हैं।

इधर, बगड़ के गौरव मरोलिया का कहना है कि कार्ड में राजस्थानी भाषा का चलन लगातार बढ़ रहा है। खासकर युवा वर्ग इसे लेकर उत्साहित है। उनका मानना है कि मायड़ बोली में छपा शादी का निमंत्रण न सिर्फ अलग पहचान देता है, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ाता है।

ये भी पढ़ें

SDM Kajal Meena : ‘हां’ भरते ही एसीबी के घेरे में आईं एसडीएम काजल, वाट्सऐप कॉल बना गले की फांस
Published on:
22 Apr 2026 08:03 am
Also Read
View All