
काजल मीणा। फाइल फोटो- पत्रिका
जयपुर/करौली। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नादौती उपखंड में भ्रष्टाचार के मामले परतें खोल रही है। पिछले दिनों तत्कालीन एसडीएम काजल मीणा, उनके रीडर और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
एसीबी की जांच में यह परत दर परत साफ हो गया है कि जमीन विभाजन की फाइनल डिक्री जारी करने की एवज में मांगी गई रिश्वत की डोर सीधे एसडीएम कार्यालय की मुख्य कुर्सी तक जा रही थी। एसीबी ने इस मामले में एसडीएम काजल मीणा, रीडर दिनेश कुमार सैनी और सहयोगी प्रवीण कुमार धाकड़ को गिरफ्तार किया था। ब्यूरो अब बरामद डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर और कॉल डिटेल्स की फॉरेंसिक जांच करवा रहा है।
परिवादी अपनी पैतृक भूमि के विभाजन की डिक्री के लिए लंबे समय से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि जब वह एसडीएम काजल मीणा से मिला, तो उन्हें उनके रीडर से बात करने का इशारा किया गया। सौदेबाजी के दौरान पहले 1 लाख और फिर 50 हजार रुपए की राशि तय हुई। इसके अलावा, रीडर दिनेश कुमार सैनी ने अपने लिए अलग से 10 हजार रुपए की मांग रखी।
एसीबी की एफआइआर के अनुसार, कार्रवाई के दौरान डिजिटल साक्ष्य सबसे अहम साबित हुए हैं। जब टीम ने रीडर दिनेश कुमार को ट्रैप किया, तो उसने रिश्वत की राशि काजल मीणा के लिए लेना स्वीकार किया। रीडर ने रिश्वत की रकम मिलने के बाद एसडीएम को वाट्सऐप कॉल कर सूचना दी। रिकॉर्डिंग के अनुसार, एसडीएम ने इस राशि को स्वीकार करने के संबंध में ‘हां’ भरी, जो अब उनके खिलाफ सबसे बड़ा कानूनी साक्ष्य है। रिश्वत की राशि सहकर्मी प्रवीण कुमार धाकड़ के पास से बरामद की गई।
उल्लेखनीय है कि एसीबी ने पूर्व में कार्रवाई करते हुए काजल मीणा को 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद सरकार ने काजल मीणा को निलंबित कर दिया। कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार, एसीबी ने 16 अप्रेल को उन्हें गिरफ्तार किया था और निलंबन भी उसी दिन से प्रभावी माना गया है। निलंबन अवधि के दौरान काजल मीणा का मुख्यालय सचिव, कार्मिक विभाग, जयपुर रहेगा।
Published on:
22 Apr 2026 07:00 am
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