झुंझुनूं जिले के चिड़ावा निवासी प्रशिक्षु एसआई बिजेंद्र कुमार और एक युवती का नाम सामने आया था। पुलिस ने युवती को दस्तयाब कर एसओजी के हवाले किया था।
झुंझुनूं। राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को वर्ष 2021 में हुई उप निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया। यह वही भर्ती है, जिसमें झुंझुनूं जिले के चिड़ावा निवासी प्रशिक्षु एसआई बिजेंद्र कुमार और एक युवती का नाम सामने आया था। पुलिस ने युवती को दस्तयाब कर एसओजी के हवाले किया था। जांच में पता चला कि उसने परीक्षा में नकल गिरोह से मदद ली थी।
चिड़ावा निवासी बिजेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने नकल गिरोह को 10 लाख रुपए दिए थे। 7 लाख नकद और 3 लाख ऑनलाइन। बिजेंद्र वर्ष 2003 से 2019 तक सेना में सेवाएं दे चुका है और रिटायरमेंट के बाद पूर्व सैनिक कोटे से एसआई भर्ती परीक्षा-2021 दी थी। भर्ती परीक्षा में नकल में मालीगांव के राकेश का नाम भी सामने आया था। राकेश को परीक्षा परिणाम में 13वीं रैंक मिली थी।
इस पूरे मामले में पहले से जेल में बंद स्कूल संचालक सोमेश का नाम भी सामने आया। वह पहले फर्जी डिग्री बनवाने और वेरिफिकेशन कराने के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। बिजेंद्र से पूछताछ के बाद चिड़ावा निवासी ऋतु शर्मा, जोधपुर निवासी स्कूल संचालक अनिल सांखला और हैंडीक्राफ्ट व्यापारी अर्जुनराम प्रजापत के नाम भी उजागर हुए थे। पुलिस ने ऋतु शर्मा को चिड़ावा से दस्तयाब किया। इसके बाद उसे एसओजी ले गई।
मामले में युवती मोनिका को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मोनिका ने अजमेर में हुए पेपर को 15 लाख में खरीदा था और ब्लूटूथ के माध्यम से नकल कर हिंदी व सामान्य ज्ञान में असाधारण अंक प्राप्त किए थे। मोनिका ने हिंदी में 200 में से 184 और सामान्य ज्ञान में 200 में से 161 नंबर हासिल किए थे। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मोनिका की कमजोर हिंदी और अन्य विषयों पर कमजोर पकड़ देखकर संदेह हुआ।
उसने झुंझुनूं के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को जो पत्र लिखा, उसमें भी 13 से अधिक गलतियां पाई गईं थी। एसओजी द्वारा पेपर सप्लायर की गिरफ्तारी के बाद मोनिका सक्रिय हो गई थी और कार्रवाई से बचने के लिए प्रशिक्षण से गायब हो गई। एसओजी ने उसे झुंझुनूं में जॉगिंग करने के दौरान उसे दबोच लिया था। ट्रेनिंग के दौरान मोनिका का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उसने दावा किया था कि उसे 301 नंबर मिले, जबकि असल में उसे 354 अंक मिले थे। अधिक अंक आने से उसका मेरिट लिस्ट में 34वां स्थान आया था, जबकि इंटरव्यू में मात्र 15 अंक ही मिले थे।
जांच में सामने आया था कि बिजेंद्र की शैक्षणिक उपलब्धी बेहद कमजोर रही है। उसने 10वीं में 55त्न, 12वीं में 49त्न और बीए में केवल 47त्न अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद नकल गिरोह की मदद से वह परीक्षा में उच्च अंक लाकर चयनित हो गया। एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर नकल कराने और चयन पक्का करने का काम करता था। बिजेंद्र का मामला इसी बड़ी साजिश का हिस्सा साबित हुआ।