झुंझुनू

राजस्थान का अनूठा धाम, इस जिले से होती है एंट्री और बाहर निकलते ही पहुंच जाते है हरियाणा

Unique Temple: राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर स्थित झुंझुनूं का रामेश्वरदास धाम अपनी अनोखी परंपराओं और खास बनावट के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां नकद दान पूरी तरह प्रतिबंधित है और भक्तों को निशुल्क प्रसाद दिया जाता है।

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Mar 17, 2026
फोटो: पत्रिका

Baba Rameshwar Das Temple: झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के टीबा बसई गांव में स्थित रामेश्वरदास धाम अपनी भौगोलिक स्थिति और अनूठी परंपराओं के कारण खास पहचान रखता है। दुग्धभागा नदी के तट पर बना यह मंदिर राजस्थान और हरियाणा को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। यहां सालभर दोनों राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर का प्रवेश द्वार राजस्थान के झुंझुनूं जिले के टीबा बसई गांव में है, जबकि इसका पिछला हिस्सा हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के ब्राह्मणवास गांव की सीमा में आता है। यही कारण है कि यह धाम दो राज्यों की सीमा पर स्थित एक अनोखा धार्मिक स्थल बन गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को राजस्थान और हरियाणा दोनों प्रदेशों की संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थान अपनी विशेष परंपराओं के कारण भी लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है।

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मिश्री-पेड़ों का मिलता है प्रसाद

धाम की एक खास पहचान यह भी है कि यह पूरी तरह दान-मुक्त परिसर है। आधुनिक दौर में जहां अधिकांश मंदिरों में दान-दक्षिणा की व्यवस्था होती है, वहीं यहां नकद दान पूरी तरह प्रतिबंधित है। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का आर्थिक दान नहीं लिया जाता। यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को मिश्री और पेड़ों का प्रसाद वितरित किया जाता है, जो भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसके अलावा समय पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की रसोई में निःशुल्क प्रसाद की व्यवस्था भी रहती है, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को भी सुविधा मिलती है।

दीवारों पर उकेरी गई अनोखी चित्रकारी

मंदिर की दीवारों पर हजारों तैलीय चित्र उकेरे गए हैं, जो इस धाम की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। कुशल कारीगरों ने शीशे पर हाथ से गीता और रामायण के श्लोकों की चित्रकारी और लेखन किया है। धाम के गीता भवन में श्रीमद्भगवद्गीता के सभी अध्याय कांच की पट्टियों पर उकेरे गए हैं। इस कलाकृति की सबसे खास बात यह है कि पूरी गीता को उल्टे अक्षरों में लिखा गया है, जो बाहर से देखने पर सीधे और स्पष्ट दिखाई देती है। यही अनोखी कला और धार्मिक आस्था इस धाम को श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती है।

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Updated on:
17 Mar 2026 02:12 pm
Published on:
17 Mar 2026 10:23 am
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