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Nagaur: शहीद सूबेदार का बक्सा तिरंगे के साथ गांव पहुंचा,पार्थिव देह नहीं मिलने पर कुश का पुतला बनाकर अंत्येष्टि

Martyr Subedar Punar Ram Dogiwal: उत्तराखंड में बीते वर्ष आई प्राकृतिक आपदा में लापता हुए परबतसर के कुराडा गांव के सूबेदार पुनाराम डोगीवाल को सेना ने शहीद मान लिया है। गांव में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

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शहीद सूबेदार पुनाराम डोगीवाल, पत्रिका फोटो

शहीद सूबेदार पुनाराम डोगीवाल, पत्रिका फोटो

Martyr Subedar Punar Ram Dogiwal: उत्तराखंड में बीते वर्ष आई प्राकृतिक आपदा में लापता हुए परबतसर के कुराडा गांव के सूबेदार पुनाराम डोगीवाल को सेना ने शहीद मान लिया है। सेना ने उनके परिजनों को सोमवार को सूबेदार का बक्सा, वर्दी और तिरंगा सौंपा। इसके बाद गांव में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

पार्थिव देह नहीं, कुश का पुतला बनाकर अंत्येष्टि

पार्थिव देह नहीं मिलने के कारण कुश का पुतला बनाकर सेना के जवानों की मौजूदगी में विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। सेना का वाहन जब सूबेदार का सामान लेकर गांव पहुंचा तो माहौल भावुक हो गया। तिरंगा उनके पुत्र कुलजीत और रविंद्र को सौंपा गया। इसके बाद सेना के वाहन के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई।

5 अगस्त को आपदा में हुए थे लापता

गौरतलब है कि उत्तराखंड के धराली क्षेत्र में 5 अगस्त, 2025 को बादल फटने से आई आपदा में 14 राजपुताना राइफल्स में तैनात सूबेदार पुनाराम डोगीवाल लापता हो गए थे। वे सेना के कैंप में ड्यूटी पर थे और तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है। परिजनों से उनकी अंतिम बार बात 5 अगस्त को हुई थी।

करगिल युद्ध के बाद बदली परंपरा

रिटायर्ड कैप्टन लियाकत अली खान ने बताया कि करगिल युद्ध से पहले लंबे समय तक यह व्यवस्था थी कि सीमा पर शहीद होने वाले सैनिकों के पार्थिव शरीर को उनके घर तक नहीं भेजा जाता था। कई मामलों में यूनिट या नजदीकी सैन्य स्थल पर ही अंतिम संस्कार कर दिया जाता था और परिवार को केवल सूचना व सामान भेजा जाता था।

1999 के करगिल युद्ध के दौरान देशभर में मांग उठने के बाद केंद्र सरकार ने नीति में बदलाव किया। इसके बाद से शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटकर उनके गृह स्थान तक लाने और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की परंपरा शुरू हुई।