पेंशनर्स सोसायटी के अध्यक्ष ने बताया कि बीते सात महीनों से पेंशन न मिलने के कारण पेंशनर्स परेशान हैं। उनकी मांग है कि पेंशन का भार सरकार वहन करे, क्योंकि प्रदेश के किसी भी विवि की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।
सात महीने से पेंशन का इंतजार कर रहे जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) के करीब 1500 पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार ने सोमवार को विवि को 50 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत कर दिया। मंगलवार को यह राशि विवि के बैंक खाते में आने की संभावना है। राशि आते ही पेंशनर्स को लंबित पेंशन जारी कर दी जाएगी।
जेएनवीयू को यह लोन 10 प्रतिशत ब्याज दर पर मिला है। यानी विवि को हर साल करीब पांच करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाने होंगे। यह बोझ ऐसे समय में आ रहा है जब विवि पर पहले से ही लगभग 350 करोड़ रुपए की देनदारियां हैं, जिनमें तीन साल से गेस्ट फैकल्टी का भुगतान, पेंशन और परीक्षा आयोजन के शुल्क शामिल हैं।
पेंशनर्स सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. रामनिवास शर्मा ने बताया कि बीते सात महीनों से पेंशन न मिलने के कारण पेंशनर्स परेशान हैं। उनकी मांग है कि पेंशन का भार सरकार वहन करे, क्योंकि प्रदेश के किसी भी विवि की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। जेएनवीयू में हर महीने लगभग आठ करोड़ रुपए पेंशन का खर्च है।
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सोमवार को पेंशनर्स का धरना 72वें दिन पर था। चार दिन पहले राज्यपाल के दौरे के दौरान कार्यवाहक कुलपति प्रो. अजीत कुमार कर्नाटक ने ‘बाय सर्कुलर’ सिंडिकेट बैठक में लोन लेने की मंजूरी दी थी। पचास करोड़ रुपए से वर्तमान पेंशन संकट तो हल होगा, लेकिन दो-तीन महीने बाद फिर यही समस्या सामने आने की आशंका है।