
जोधपुर. साढ़े तीन साल की मासूम के साथ हैवानियत से हर कोई सिहर उठा। दरिंदगी के बाद लहुलुहान मासूम का ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक भी इस कदर विचलित हुए कि वे गुरुवार शाम तक कुछ बताने की स्थिति में नहीं थे। अस्पताल में भर्ती मासूम दर्द के साथ तड़प रही है। ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. सुनील कोठारी के अनुसार रात साढ़े 12 बजे बाद लहुलुहान बच्ची को उम्मेद अस्पताल लाया गया था। उस समय उसकी हालात बेहद नाजुक थी। डॉ. ऋतु ने भी ऑपरेशन में साथ दिया। मासूम के अंदरुनी अंगों पर गहरी चोटें लगी थी। वहां 10 से 15 टांके लगे। टांकों के बाद चोटों को ठीक होने में करीब 15 दिन लग सकते हैं।
ऑपरेशन के बाद इलाज में दर्द निवारक इंजेक्शन व दवा से उसका शारीरिक दर्द भले ही कुछ कम हो रहा है, लेकिन उसके मन-मस्तिष्क पर वहशीपन का वह मंजर गहरे आघात की तरह बैठ गया है। दवा का असर कम होने पर उसकी निन्द्रा टूटती है, तो रात का खौफनाक मंजर याद कर उसकी चीख निकल जाती है। अस्पताल में दर्द से चीखने पर उसके परिजन व नर्सिंग स्टाफ उसके सिर पर हाथ रख उसे सबकुछ ठीक होने का संबल दे रहे हैं।
दस मिनट की देरी पर कर सकता था हत्या
पुलिस अधीक्षक (जीआरपी) राजन दुष्यंत ने बताया कि बच्ची के गायब होते ही पुलिस ने जैसलमेर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन के साथ प्लेटफॉर्म व स्टेशन पर तलाश की। फिर ट्रैक के किनारे सघनता से जांच कराई गई। एक घंटे में झाडिय़ों में बच्ची मिल गई। दस मिनट की देरी होने पर आरोपी हाथ से निकल सकता था और वह बच्ची का सिर फोडकऱ हत्या भी कर देता।
केस ऑफिसर स्कीम में जांच, फांसी भी संभव
एसपी दुष्यंत ने बताया कि जांच के लिए प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लिया जाएगा। जल्द से जल्द उसके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर ट्रायल कराई जाएगी। पोक्सो अधिनियम के नए प्रावधान के तहत बारह साल से कम उम्र की बच्ची से बलात्कार करने पर फांसी की सजा का प्रावधान है। आरोपी को जल्द से जल्द सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।