
जोधपुर। पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की घटना के एक माह के भीतर अब जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। पिछले दो दिनों में सिजेरियन प्रसव कराने वाली पांच महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से दो की हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखना पड़ा, जबकि तीन अन्य का आईसीयू में उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को ऑपरेशन के बाद दो महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। इससे एक दिन पहले तीन अन्य महिलाओं में भी अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति बनी थी। जिसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव गंभीर आपात स्थितियों में से एक है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है।
हैरान कर देने वाली बात ये है कि उम्मेद अस्पताल में एक प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ा दिया। प्रथम दृष्टया एक जैसे नाम और पति के नाम भी एक समान होने के कारण यह गलती बताई जा रही है। महिला का उपचार फिलहाल महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर में चल रहा है। परिजनों के अनुसार धापू की 11 जुलाई का बावड़ी में सामान्य प्रसव हुआ था। रक्त की कमी होने पर उसे उसी दिन उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहले ओ पॉजिटिव रक्त चढ़ाया गया। इससे उसकी तबीयत सामान्य रही। आरोप है कि 12 जुलाई की रात दूसरी बार गलती से बी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। इसके तुरंत बाद उसे कंपकंपी शुरू हो गई और पेशाब में रक्त आने लगा। अगले दिन उसे महात्मा गांधी अस्पताल रेफर करना पड़ा। अस्पताल की प्रारंभिक जांच में ब्लड यूनिट की पहचान में चूक सामने आई है।
इस मामले की जांच के लिए उम्मेद अस्पताल प्रशासन ने जो कमेटी गठित की है उसने प्रारंभिक तौर पर दोष माना है। ब्लड यूनिट की पहचान में चूक हो गई और ओ पॉजिटिव की जगह बी पॉजिटिव रक्त धापू को चढ़ा दिया गया। हालांकि दोनों मरीजों के ब्लड ग्रुप और अन्य पहचान संबंधी विवरण अलग-अलग दर्ज थे। लेकिन उम्मेद अस्पताल ब्लड बैंक की टीम की ओर से इस पर गंभीरता नहीं बरती गई।
गलत ब्लड ग्रुप चलाने के कारण कुछ समय पहले एम्स जोधपुर में एक मरीज की जान जा चुकी है। उधर एमजीच में भर्ती धापू के परिजनों ने बताया कि उन्हें अस्पताल प्रबंधन की ओर से तबीयत बिगड़ने के कोई कारण नहीं बताए गए।