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जालोर: ‘मम्मी-पापा मुझे माफ करना’ लिखकर मामा के ऑफिस में भांजे ने की खुदकुशी; सामने आई वजह

जालोर शहर की शास्त्री नगर कॉलोनी में बंद कमरे युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। एएसआई हिमताराम ने बताया कि मृतक की पहचान रामदेव कॉलोनी शांति नगर बी ब्लॉक निवासी राहुल माली (27) पुत्र चौपाराम के रूप में हुई।
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जालोर

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Anil Prajapat

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Updated: 18 Jul 2026, 8:35 AM IST

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राहुल माली। पत्रिका फाइल फोटो

जालोर। जालोर शहर की शास्त्री नगर कॉलोनी में बंद कमरे युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। एएसआई हिमताराम ने बताया कि मृतक की पहचान रामदेव कॉलोनी शांति नगर बी ब्लॉक निवासी राहुल माली (27) पुत्र चौपाराम के रूप में हुई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतरवाकर मोर्चरी में रखवाया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया। पुलिस ने भाई की रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज किया। मामा के ऑफिस में नहीं होने पर पीछे से भांजे ने खुदकुशी की। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

जानकारी के अनुसार मामा बंशीलाल का जालोर शहर के शास्त्री नगर में ऑफिस है। जिसमें वे अकाउंटस का काम करते हैं। राहुल भी पिछले एक दशक से यहीं कार्य करता था। शुक्रवार को बंशीलाल किसी कार्य से बाहर थे। रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी राहुल माली काम करने के लिए ऑफिस पहुंचा। कुछ ही देर बाद उसके मामा बंशीलाल किसी काम से बाहर चले गए। इस दौरान ऑफिस में राहुल अकेला था। दोपहर बाद राहुल ने अंदर से गेट बंद किया और पंखे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

पुलिस ने दरवाजा तोड़कर निकाला शव

ऑफिस के पास रहने वाले लोगों ने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब न मिलने पर बंशीलाल को फोन करके मौके पर बुलाया। काफी प्रयास के बाद भी राहुल ने दरवाजा नहीं खोला तो लोग छत के रास्ते अंदर आए। जहां पर राहुल को पंखे से लटका देख होश उड़ गए। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें लिखा है कि मम्मी-पापा मुझे माफ करना। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।

लगातार असफलता से डिप्रेशन में था

मृतक के परिजनों के अनुसार राहुल पिछले 7 साल से विभिन्न कंपीटिशन की तैयारी कर रहा था। इस अवधि में 10 से अधिक कंपीटिशन भी दिए, लेकिन सफलता नहीं मिली। कुछ माह पूर्व सुपरवाइजर की वैकेंसी में भी वह रह गया। जिसके बाद से वह मानसिक तनाव में था। परिवार जनों और मामा बंशीलाल से अक्सर वह चर्चा करता रहता था। परिजनों ने उसे चिंता नहीं करने और मेहनत करने की बात कही, लेकिन उसके बावजूद उसने शुक्रवार को मामा के ऑफिस में आत्महत्या कर ली।