
के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर के अधीन महात्मा गांधी अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में 30 से 50 साल से अधिक समय के पुराने सीवरेज सिस्टम के ढांचे को सुधारा जाएगा। चूंकि महात्मा गांधी अस्पताल, उम्मेद अस्पताल, कमला नेहरू टीबी अस्पताल, मथुरादास माथुर अस्पताल में सीवरेज सिस्टम सालों पहले से बिगड़ा हुआ हैं, कई सालों से सीवरेज सिस्टम को दुरस्त करने की डिमांड हो रही है। कई सालों की परेशानी के बाद अब सार्वजनिक निर्माण विभाग (मेडिकल विंग) ने अस्पतालों का सीवरेज तंत्र को नए सिरे से स्थापित करने के लिए सर्वे शुरू करवाया है।
विभाग ने एक फर्म के जरिए अस्पतालों में नए स्थापित होने वाले सीवरेज सिस्टम के लिए लेवल सर्वे शुरू करवाया है, ताकि किस नाली का पानी किस तरह जाना चाहिए, उसका लेवल कितना रहना चाहिए, तमाम तरह का खाका तैयार किया जा रहा है। साथ ही नए सिस्टम में अब एक ही लाइन पर लोड नहीं रखा जाएगा। वर्तमान में सभी अस्पतालों में सीवरेज लाइनों का लोड एक ही लाइन पर होने के कारण सिस्टम बार-बार ठप हो रहा है। गांधी अस्पताल में सीवरेज लाइन ब्लॉक होने एवं बरसात के समय पानी आगे नहीं बढऩे की बड़ी परेशानी हर साल सामने आ रही है। लेकिन नए सिस्टम में सीवरेज लाइनों में डायवर्जन सिस्टम रखा जाएगा। एक लाइन ठप हुई तो दूसरी लाइन से पानी जा सकेगा। साथ ही एक ही लाइन पर पानी की निकासी का लोड नहीं रखा जाएगा। एक अस्पताल में चारों तरफ से अलग-अलग लाइनों के जरिए लाइनों की निकासी रहेगी, ताकि कहीं से भी ब्लॉक होने की स्थिति पैदा नहीं होगी।
डिजाइन के बाद बजट प्लान तैयार होगा-
विभाग की ओर से सभी अस्पतालों के नए सीवरेज सिस्टम की डिजाइन तैयार की जाएगी। उसके बाद उस पर अनुमानित लागत क्या आएगी, उसके अनुसार प्लान तैयार किया जाएगा। और उसी के अनुरूप सरकार से बजट मांगा जाएगा।
इनका कहना है-
अस्पतालों में वर्षों पुराना सीवरेज सिस्टम खराब हो चुका है। अस्पतालों की डिमांड पर सर्वे शुरू करवाया जाएगा। खाका तैयार होने के बाद बजट प्लान तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा।
-के. के. सिंहल, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग (मेडिकल विंग), जोधपुर