
जोधपुर.
वायुसेना के वाई ग्रुप में गारंटीड चयन कराने के नाम पर एक बेरोजगार युवक से कोचिंग सेंटर संचालक व उसके पिता ने साढ़े छह लाख रुपए एेंठ लिए। चयन न होने पर छात्र कोचिंग संचालक के मकान पहुंचा तो ऋण अदायगी न होने पर बैंक का कब्जा मिला। कोचिंग सेंटर भी किसी अन्य को किराए पर दे दिया गया था। पीडि़त ने बनाड़ थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
पुलिस के अनुसार नागौर जिले में खींवसर थानान्तर्गत नागड़ी निवासी रामकरण पुत्र ईश्वरलाल देवासी ने वायुसेना स्टेशन के पास व्यास कॉलोनी स्थित गौरव करियर कोचिंग के संचालक गौरव गहलोत व उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
आरोप है कि रामकरण के मित्र सुखराम का वायुसेना में चयन हो रखा है। उसने वायुसेना में चयन के लिए गौरव करियर कोचिंग से गारंटीड बैच में कोचिंग करने पर शर्तिया चयन का भरोसा दिलाया था। तब वह कोचिंग सेंटर संचालक गौरव गहलोत से मिला था और वायुसेना के वाई ग्रुप में भर्ती के लिए विशेष बैच में प्रवेश के लिए बात की थी। उसने ५० हजार रुपए मांगे थे। साथ ही चयन न होने पर राशि लौटाने के लिए शपथपत्र में राशि का उल्लेख करने का विश्वास दिलाया था। गत वर्ष छह फरवरी को उसने गौरव को पचास हजार रुपए दिए थे। संचालक ने पचास रुपए के शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी किए।
इसके बाद ४०-४५ दिन तक उसने सेंटर के विशेष बैच में कोचिंग की। गत वर्ष १६ मार्च को वायसुेना ग्रुप वाई प्रथम फेस की परीक्षा हुई जो बनाड़ स्थित ऑनलाइन सेंटर पर ली गई थी। ९ अप्रेल को घोषित परिणाम में अंतिम चयन सूची में रामकरण का चयन नहीं हुआ।
तब वह कोचिंग सेंटर संचालक के पास गया और फीस लौटाने का आग्रह किया। संचालक ने उससे कहा कि उसके पिता वायुसेना में ग्रुप कैप्टन से सेवानिवृत्त हैं और उनकी वायुसेना मुख्यालय में पहुंच हैं। वो उसका शर्तिया चयन करा देंगे। इस झांसे में आकर वह संचालक के पिता डॉ एनआर गहलोत से मिला। उन्होंने चयन के लिए छह लाख रुपए और मांगे। १५ मई को वह पिता के साथ बनाड़ रोड पर रमजान हत्था में संचालक के किराए के ऑफिस में गया और संचालक व उसके पिता को छह लाख रुपए दिए थे। बीस फरवरी तक चयन का विश्वास दिलाया था, लेकिन २९ फरवरी तक इंतजार करने के बावजूद उसका चयन नहीं हुआ।
मोबाइल पर संपर्क नहीं हुआ तो वह कोचिंग सेंटर पहुंचा, जहां उसे पता लगा कि संचालक पिता के हार्ट का ऑपरेशन कराने दिल्ली में है। तेरह मार्च को वह संचालक के घर पहुंचा तो ताले लगे मिले। पड़ोसियों ने बताया कि मकान पर बैंक से ऋण था। इसलिए पिता पुत्र ने मकान खाली कर दिया है और अब बैंक का कब्जा है। वह दुबारा रमजान का हत्था में कोचिंग सेंटर के कार्यालय गया तो वहां मौजूद अरविंद सिंह ने अवगत कराया कि कोचिंग सेंटर उसे किराए पर दे दिया गया है। गौरव व उसके पिता जयपुर में रहते हैं।