
जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर में जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर के तत्वावधान में रोबोटिक्स व अपशिष्ट जल आधारित महामारी विज्ञान पर समुदायों में रोग प्रकोप की आशंका विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। वेबीनार का उद्देश्य अपशिष्ट प्रबंधन तकनीक था।फ्लुइड रोबोटिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी असीम भालेराव मुख्य वक्ता थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 80 से 85 प्रतिशत अपशिष्ट जल अनुपचारित और अप्रयुक्त रहता है जो सीधे ही नदियों, झीलों और भूजल में सम्मिलित होकर जल संसाधन नष्ट करने के साथ बीमारियों का कारण बनता है। जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या में वृद्धि और रोगाणु रोधी प्रतिरोध में वृद्धि होने के कारण लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। आबादी बढऩे के साथ जन संसाधन कम होते जा रहे हैं। आने वाले दशकों में तेजी से पानी की कमी होगी। तरल रोबोटिक्स, उन्नत अपशिष्ट जल निगरानी प्रौद्योगिकी और अपशिष्ट जल आधारित महामारी विज्ञान के माध्यम से शहरों और कस्बों में अपशिष्ट जल को फिर से उपयोग करने लायक बनाया जा सकता है। इससे संक्रामक रोगों से भी बचाव होगा। वेबिनार में आइआइटी जोधपुर निदेशक प्रो शांतनु चौधरी, केमिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो प्रदीप तिवारी, भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो एसआर वडेरा, जोधपुर औद्योगिक संघ के अध्यक्ष एनके जैन सहित कई अन्य सदस्य मौजूद थे।