
जोधपुर. लोक कला मर्मज्ञ पद्मभूषण कोमल दा की 91 वीं जयंती पर गुरुवार को बाडमेर, जैसलमेर के लोक कलाकारों ने रूपायन संस्थान परिसर में उन्हें स्वरांजलि तथा श्रद्धासुमन अर्पित किए। कलाकारों में पद्मश्री अनवर खान, हाकम खान मंगनियार, मंजूर खान, शौकत खान, हयात खान और बुंदू खान लंगा आदि ने कोमल दा के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें स्वरांजलि दी। इस मौके कोमल कोठारी स्कूल ऑफ म्यूजिक के सहयोग से टेंडर रूट्स एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स ने कामयाचा प्रोजेक्ट लॉन्च किया। रूपायन संस्थान के सचिव कुलदीप कोठारी ने बताया कि कोमलदा ने अपना सम्पूर्ण जीवन राजस्थान की लोक विरासत, विशेषकर मांगनियारों और लंगा कलाकारों की संगीतमय विरासत और राजस्थान के अन्य लोक और जनजातीय प्रदर्शनकारी समुदायों की खोज और प्रचार के लिए समर्पित कर दिया। कोमल दा की लोक विरासत परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए लोक संगीतकारों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को मांगणियार संगीत की रीढ़ कहे जाने वाले लोकवाद्य यंत्र कामायचा प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। कामायचा के वरिष्ठ कलाकारों की ओर से युवा मंगानियार सदस्यों को वादन कला में प्रशिक्षित किया जाएगा। जैसलमेर के गांव सानवाड़ा के हाकम खान मांगनियार प्रथम कामायचा वादक हैं, जो अपने गांव के दो युवा मंगणियार लडक़ों सरवर और मोती को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। टेंडर रूट्स एकेडमी की परियोजना ‘मेरी कला मेरी पहचान’ के तहत प्रशिक्षक और सीखने वाले दोनों को मासिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। हर महीने प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस प्रयास से युवा मंगनियारों को अपनी विरासत पर गर्व होने के साथ कामायचा को जीवित रखने की कला सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।