जोधपुर

एमबीएम विवि का एक्ट ही गलत!, जेएनवीयू को मिला कानूनी नोटिस

- 1962 में बंद हो चुका है कॉलेज, वर्तमान में है केवल इंजीनियरिंग फैकल्टी- विवि की सिण्डीकेट ने सरकार को भिजवाया
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Nov 20, 2021
एमबीएम विवि का एक्ट ही गलत!, जेएनवीयू को मिला कानूनी नोटिस
एमबीएम विवि का एक्ट ही गलत!, जेएनवीयू को मिला कानूनी नोटिस

जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) को अपनी इंजीनियरिंग फैकल्टी की संपत्ति, शिक्षक और छात्रों को नए बने एमबीएम विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने को लेकर एक अधिवक्ता ने व्यास विश्वविद्यालय को कानूनी नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज 1962 में व्यास विश्वविद्यालय में मर्ज होते ही समाप्त हो गया था और वर्तमान में कागजों में केवल जेएनवीयू की फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में संचालित है। ऐसे में राज्य सरकार ने विधानसभा में एक्ट ही गलत पारित किया है।

नोटिसकर्ता ने गलत एक्ट के साथ व्यास विश्वविद्यालय की ओर से एमबीएम विश्वविद्यालय को इंजीनियरिंग फैकेल्टी का नॉर्थ और साउथ कैंपस सहित शिक्षक और छात्र हस्तांतरित करने को भी गलत बताया है। जेएनवीयू ने इस नोटिस को गुरुवार को सिंडिकेट की बैठक में रखा। सिंडिकेट ने इसे राज्य सरकार के पास भेजने का निर्णय किया।

केवल 7 साल रहा एमबीएम कॉलेज
देश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना 1955 में हुई थी। वर्ष 1962 में जोधपुर विश्वविद्यालय बनने के बाद यह उसमें फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में मर्ज कर दिया गया था, लेकिन बोलचाल की भाषा में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज बना रहा। इसके कारण राज्य सरकार ने भी एक्ट में इसी नाम से विश्वविद्यालय बनाने का विधेयक पास किया है।

करवड़ के पास 100 एकड़ भूमि का प्रस्ताव
उधर एमबीएम विश्वविद्यालय की ओर से राज्य सरकार को आइआइटी जोधपुर के पास करवड़ में 100 एकड़ भूमि देने का भी प्रस्ताव भेजा है ताकि नए एमबीएम विश्वविद्यालय का वहां पर निर्माण किया जा सके। राज्य सरकार इस पर भी विचार कर रही है।


‘सिण्डीकेट की बैठक से पूर्व मुझे यह नोटिस मिला था। हमने बैठक में इसको राज्य सरकार को भेजने का निर्णय किया है।’
प्रो प्रवीण चंद्र त्रिवेदी, कुलपति, जेएनवीयू जोधपुर

Published on:
20 Nov 2021 01:52 pm