
जोधपुर. टीन एज लव स्टोरी पर बेस्ड एक अनामांकित वेब सीरीज की शूटिंग के कुछ दृश्य बीते दिनों जोधपुर की मशहूर कायलाना झील के समीप पूरी हुए। इसमें लीड रोल प्ले कर रहे अभिनेता आयुष शाह ने अपने अनुभव पत्रिका के साथ साझा किए। इस वेब सीरीज के अन्य एपिसोड्स की शूटिंग राजस्थान के विभिन्न शहरों व क्षेत्रों में हुई है। शाह ने फिल्म पंख से बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय की शुरुआत की है।
पत्रिका : अभिनेता बनने का विचार कैसे आया और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
आयुष : मैं मूलत: गुजरात स्थित पालनपुर का निवासी हूं। बतौर चाइड आर्टिस्ट अभिनय की शुरुआत की है। बचपन में डांस प्रतियोगिता व ड्रामा आदि में भाग लेने के दौरान अभिनय में रुचि बढ़ी। इस शौक को उनके परिजनों ने आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पर ओ माय फ्रेंड गणेशा-2 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नकारात्मक भूमिका करने को मिली। इसके बाद टीवी सीरियल उतरन में पारस, नव्या में नव्या के छोटे भाई, महाभारत में बाल अश्वत्थामा और सूर्यपुत्र करण में कृष्ण के पुत्र सांबा के किरदार निभाए हैं।
पत्रिका : फिल्म जगत में आप किसे अपनी प्रेरणा मानते हैं?
आयुष : मैं बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को अपना आदर्श मानता हूं क्यूंकि वे नैतिकतापूर्ण कार्य करते हैं। यह सौभाग्य है कि मुझे उनके साथ काम करने का अवसर भी मिला है। अपने पहले टीवी शो नव्या करने के दौरान महेशचंद्र भट्ट और साहिल अंडारी ने भी मुझे खासा प्रेरित किया है। वे आज भी मुझे गाइड करते हैं और काम के प्रति सकारात्मक रहने की सीख देते रहते हैं।
पत्रिका : वर्तमान में कौनसे प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहे हैं?
आयुष : आगामी दिनों में मेरी एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म नाइट एंड फॉग आने वाली है। इसमें अभिनेता राहुल रॉय के साथ कार्य कर रहा हूं। फिल्म के निर्देशक तनवीर अहमद की आत्मकथा पर केंद्रित इस फिल्म में वे डबल रोल निभा रहा हूं। इस फिल्म का निर्माण अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा में किया जा रहा है। बाकी यह वेब सीरीज तो है ही।
पत्रिका : राजस्थान आकर कैसा लगा, अपने अनुभव साझा करिए?
आयुष : गुजरात का निवासी होने के नाते मुझे राजस्थान की संस्कृति हमेशा से ही लुभाती आई है। शूटिंग के दौरान कुछ समय का ब्रेक लेकर मैंने सर्वप्रथम जोधपुर के मेहरानगढ़ सहित अन्य दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। मुझे इस किले की बनावट ने सर्वाधिक लुभाया है। इसके बाद जयपुर व सूर्यवंशम फिल्म की जिस महल में शूटिंग हुई उस बालाराम पैलेस का भी भ्रमण किया है। मुझे यहां का अपनापन और लोगों की मिलनसारिता बहुत अच्छी लगती है।