जोधपुर

Rajasthan: मंत्री की बहन के बाद अब पूर्व सांसद की भतीजी का JNVU में डेपुटशन, उठने लगे कई सवाल

JNVU Deputation Controversy: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर की सह-आचार्य (विधि) डॉ. राजश्री चौधरी को जेएनवीयू जोधपुर में डेपुटेशन पर लाने का प्रस्ताव है। खास बात यह है कि डॉ. चौधरी पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे भाजपा नेता की भतीजी है, जिससे इस पूरे प्रकरण को लेकर सियासी रंग भी गहराने लगा है।
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May 06, 2026
JNVU University
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय। पत्रिका फाइल फोटो

जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है। इस बार मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर की सह-आचार्य (विधि) डॉ. राजश्री चौधरी को जेएनवीयू जोधपुर में डेपुटेशन पर लाने का प्रस्ताव है। खास बात यह है कि डॉ. चौधरी पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे भाजपा नेता की भतीजी है, जिससे इस पूरे प्रकरण को लेकर सियासी रंग भी गहराने लगा है।

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने 28 अप्रेल को एक पत्र में विश्वविद्यालय से इस प्रस्ताव पर सहमति मांगी है। पत्र में उल्लेख है कि यह मामला उप मुख्यमंत्री कार्यालय से आए पत्र के अनुसार जिसमें सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने अनुशंसा की है। अब अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय की सहमति पर निर्भर करेगा। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के स्थापित नियमों के अनुसार सामान्य स्थिति में एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति नहीं दी जाती है।

पहले भी उठ चुका है विवाद

करीब एक साल पहले भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जब एक राज्य मंत्री की बहन, जो बीकानेर के राजकीय डूंगर महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र की प्रोफेसर थी, उन्हें जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में डेपुटेशन पर लाया गया था। उस समय शिक्षकों के विरोध के बाद उन्हें यूजीसी के एमएमटीसीसी सेंटर में समायोजित करना पड़ा था।

विधि संकाय में जगह ही खाली नहीं

आधिकारिक तौर पर मुझे पत्र नहीं मिला है। हालांकि मौखिक तौर पर मुझे जानकारी मिली थी लेकिन हमारे विधि संकाय में जगह ही खाली नहीं है। हमें जरूरत नहीं है।
-प्रो. पवन कुमार शुर्मा, कुलगुरु, जेएनवीयू जोधपुर

किसी भी विवि के एक्ट में डेपुटेशन का प्रोविजन नहीं

जेएनवीयू सहित किसी भी विवि के एक्ट में डेपुटेशन का प्रोविजन नहीं है। जेएनवीयू में पहले से ही दो तीन असिस्टेंट एकाउंट ऑफिसर (एएओ) और इंजीनियर डेपुटेशन पर लगे हैं और उनकी तनख्वाह का भार उठाना पड़ रहा है। हमारी पेंशन देने के तो पैसे नहीं है।
-प्रो. रामनिवास शर्मा, सेवानिवृत्त प्रोफेसर (विधि संकाय) व अध्यक्ष, जेएनवीयू पेंशनर्स सोसायटी

Updated on:
06 May 2026 07:01 am
Published on:
06 May 2026 07:00 am