
जोधपुर।
देश में लागू होने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कृषि शिक्षा में भी काफी बदलाव देखने को मिलेगा। इसके तहत केन्द्र सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ने देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों व संस्थानों से कृषि शिक्षा का खाका तैयार करने को कहा है, जिसमें जोधपुर के कृषि विश्वविद्यालय को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। सभी विश्वविद्यालयों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर उन विषयों को नई कृषि शिक्षा में समावेश किया जाएगा।
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कौशल विकास व प्रायोगिक ज्ञान को महतव
कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा में प्रमुख रूप से प्रिसिजन खेती, वाटर हार्वेस्टिंग, नैनो तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमता, खाद्य संग्रहण प्रसंस्करण व विभिन्न वैज्ञानिक तकनीक आधारित नए पाठ्यक्रमों को जोडऩे का प्रस्ताव तैयार किया है। नई शिक्षा नीति व कृषि शिक्षा में व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास व प्रायोगिक ज्ञान पर काफी महत्व दिया जाएगा।
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देश में 74 कृषि विवि व संस्थान
वर्तमान में देश में 74 कृषि विवि व संस्थान है, जो नई कृषि शिक्षा को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहे है। सभी संस्थानों द्वारा तैयार प्रस्ताव केन्द्र सरकार की गठित कमेटी देखेगी व प्रस्तावों पर मंथन करेगी। इसके बाद ही विषयों को नई कृषि शिक्षा में जोड़ा जाएगा। वर्तमान में जोधपुर कृषि विवि में स्नातकस्तर पर 16 विषयों में शिक्षण व स्नातकोत्तर स्तर पर करीब 6 विषयों में डिग्री दी जा रही है।
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ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन में होगी चर्चा
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय का सातवां स्थापना दिवस सोमवार को मनाया जाएगा। समारोह में ब्रेन स्टार्मिंग सेशन में प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों, किसानों व विद्यार्थियों को कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा में होने वाले बदलाव की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, सभी से फीडबैक लेकर विश्वविद्यालय प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजेगा।
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देश में नई शिक्षा नीति के तहत कृषि शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन होगा। जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी चल रही है। हमने भी कृषि शिक्षा के लिए प्रस्ताव तैयार किए है, जो जल्द ही केन्द्र सरकार को भेजे जाएंगे।
प्रो बीएस भीमावत, डीन
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर