जोधपुर

AGRICULTURE UNIVERSITY– टिड्डियों के साथ फसली कीड़ों से मुकाबला करेगा कृषि विवि

- ड्रोन से करेगा नियंत्रण- कृषि विश्वविद्यालय पहली बार कर रहा ड्रोन का प्रयोग - पानी व समय की होगी बचत
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Jul 25, 2020
AGRICULTURE UNIVERSITY-- टिड्डियों के साथ फसली कीड़ों से मुकाबला करेगा कृषि विवि
AGRICULTURE UNIVERSITY-- टिड्डियों के साथ फसली कीड़ों से मुकाबला करेगा कृषि विवि

जोधपुर।

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय अब ड्रोन से टिड्डियों के साथ फसली बीमारियों व फसलों में लगने वाले कीड़ों से मुकाबला करने की तैयारी कर ली है। विश्वविद्यालय को यह ड्रोन हैदराबाद (तेलंगाना) की फर्टीलाइजर कम्पनी बायर क्रॉप साइंस लिमिटेड के माध्यम से ड्रोन पार्टनर कम्पनी थेनोज टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराया है। शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर में रिसर्च फील्ड (खेत) में ड्रोन का प्रारंभिक प्रयोग किया जा रहा है।

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टिड्डियों से बचाना मुख्य उद्देश्य

हाल ही टिड्डियों के प्रकोप से राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में टिड्डियों ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ड्रोन के प्रयोग का प्रमुख उद्देश्य फसलों को टिड्डियों से बचाना है। ड्रोन से खेतों में छिडक़ाव कर टेस्टिंग की जाएगीसाथ ही, विभिन्न फसलों में लगने वाली बीमारियों व कीड़ों से फसलों को सुरक्षित रखना है।

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एफएओ द्वारा सुझाए कीटनाशकों का ही छिडक़ाव

विश्वविद्यालय में अभी दो ड्रोन आए है। एक पांच पंखों वाला व दूसरा छह पंखों वाला है। विश्वविद्यालय ड्रोन से फूड एण्ड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) द्वारा सुझाए गए कीटनाशकों का ही छिडक़ाव कर रहा है।

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पानी व समय की बचत होगी

- ड्रोन से खेतों में फसलों पर छिडक़ाव से पानी व समय की काफी बचत होगी।

- ड्रोन एक हेक्टेयर खेत को करीब 8 से 10 मिनट में छिडक़ाव कर देता है, जबकि ट्रेक्टर ऑपरेटेड स्प्रेयर काफी घंटे लग जाते है।

- ड्रोन से कीटनाशक का छिडक़ाव के लिए करीब 20 लीटर पानी की जरुरत होती है, जबकि ट्रेक्टर ऑपरेटेड स्प्रेयर में करीब 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है।

- ड्रोन स्प्रे के दौरान करीब साढ़े चार मीटर एरिया कवर कर सकता है, ट्रेक्टर ऑपरेटेड स्प्रेयर में यह संभव नहीं है।

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टिड्डियों व फसली कीड़ों का मुकाबला करने के लिए ड्रोन का प्रयोग कर रहे है। अभी प्रारंभिक स्तर पर ड्रोन की टेस्टिंग की जा रही है।

प्रो डॉ बीआर चौधरी, कुलपति

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

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ड्रोन व ट्रेक्टर ऑपरेटेड स्प्रेयर के बीच एफीसिएन्सी देखी जा रही है। परिणाम सकारात्मक आने पर विश्वविद्यालय से संबंद्ध दूसरे केन्द्रों पर भी इसका प्रयोग किया जाएगा।

डॉ मनमोहन सुन्दरिया, कीट वैज्ञानिक

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

Published on:
25 Jul 2020 08:01 pm