जोधपुर

गुड न्यूज: अब पुरुष बांझपन का इलाज होगा आसान! सर्जरी से निकाले शुक्राणु, AIIMS जोधपुर के डॉक्टरों ने किया कमाल

पुरुष के शरीर में शुक्राणु बनने के बावजूद प्रजनन मार्ग में जन्मजात अवरोध के कारण उनका वीर्य में नहीं पहुंच पाना अब संतान प्राप्ति में बाधा नहीं बनेगा। एम्स जोधपुर में जन्मजात अवरोधक एजूस्पर्मिया से जूझ रहे एक दंपती को आधुनिक प्रजनन तकनीक के जरिए संतान सुख मिला है।
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Updated: 5 Nov 2026, 10:34 AM IST
aiims jodhpur doctors retrieve sperm
AIIMS Jodhpur Doctors Retrieve Sperm (Photo-AI)

AIIMS Jodhpur Doctors Retrieve Sperm: पुरुषों में शुक्राणु बनने के बावजूद प्रजनन मार्ग में जन्मजात अवरोध के कारण उनका वीर्य तक नहीं पहुंच पाना अब संतान प्राप्ति में बाधा नहीं बनेगा। आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने ऐसे दंपती के लिए भी माता-पिता बनने की उम्मीद जगाई है, जो इस समस्या के कारण लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं। एम्स जोधपुर में जन्मजात अवरोधक एजूस्पर्मिया (Obstructive Azoospermia) से जूझ रहे एक दंपती को आधुनिक प्रजनन तकनीक की मदद से संतान सुख मिला है। संस्थान में पहली बार सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और आईवीएफ-आईसीएसआई तकनीक के जरिए शिशु का सफल जन्म हुआ है। सफल गर्भावस्था के बाद जन्मे शिशु और मां दोनों स्वस्थ हैं।

इस उपलब्धि के साथ एम्स जोधपुर ने पुरुष बांझपन के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस तकनीक की खास बात यह है कि जिन पुरुषों के शरीर में शुक्राणु बनते हैं, लेकिन प्रजनन मार्ग में किसी जन्मजात अवरोध के कारण वे वीर्य में नहीं पहुंच पाते, उनके लिए भी संतान प्राप्ति का रास्ता खुल सकता है।

ऐसे मामलों में सामान्य रूप से वीर्य में शुक्राणु नहीं मिलने के कारण दंपती को संतान प्राप्ति में परेशानी होती है। हालांकि, सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक के जरिए पुरुष के शरीर से सीधे शुक्राणु प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके बाद इन शुक्राणुओं का उपयोग आईवीएफ की उन्नत तकनीक के माध्यम से निषेचन के लिए किया जाता है।

इस जटिल प्रक्रिया को एम्स जोधपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मनु गोयल और उनकी टीम के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों से पूरी प्रक्रिया सफल रही और दंपती को संतान सुख मिला।

यह रही पूरी प्रक्रिया

इस उपचार में सबसे पहले पुरुष के प्रजनन तंत्र से शल्य चिकित्सा के जरिए शुक्राणु प्राप्त किए गए। इसके बाद आईवीएफ की उन्नत तकनीक इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में प्राप्त किए गए शुक्राणुओं में से एक शुक्राणु को सीधे महिला के अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इससे प्रयोगशाला में निषेचन की प्रक्रिया पूरी की जाती है और भ्रूण विकसित किया जाता है।

इसके बाद प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया गया। प्रक्रिया सफल रहने के बाद महिला ने गर्भधारण किया। गर्भावस्था पूरी होने पर शिशु का जन्म हुआ। चिकित्सकों के अनुसार, जन्म के बाद मां और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।

पुरुष बांझपन के उपचार में महत्वपूर्ण उपलब्धि

एम्स जोधपुर में इस तकनीक से पहली बार शिशु का सफल जन्म होना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खासकर उन दंपती के लिए यह तकनीक उम्मीद की नई किरण है, जिनके मामले में पुरुष के शरीर में शुक्राणु बनने के बावजूद जन्मजात अवरोध के कारण वे वीर्य में नहीं पहुंच पाते। ऐसे मामलों में सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल के जरिए शुक्राणु प्राप्त कर आईवीएफ-आईसीएसआई की सहायता से निषेचन और भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

इस सफल उपचार ने यह साबित किया है कि जन्मजात अवरोधक एजूस्पर्मिया के कुछ मामलों में आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से संतान प्राप्ति संभव है। एम्स जोधपुर की यह उपलब्धि पुरुष बांझपन के उपचार में नई संभावनाओं को सामने लाती है।

Updated on:
5 Nov 2026, 10:34 AM IST
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