
बासनी ( जोधपुर ).
संत चिडिय़ानाथजी की तपोभूमि पालासनी आसन के तालाब पर बुधवार को हजारों लोगों ने श्रमदान कर जल संरक्षण का अनूठा संदेश दिया। राजस्थान पत्रिका के अमृतं-जलम् महाभियान के तहत आयोजित स्वैच्छिक श्रमदान में पालासनी गांव के अलावा आस-पास के गांवों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर तालाब को निखार दिया। लोगों ने उत्साह से श्रमदान कर पारंपरिक जल स्त्रोतों का संरक्षण एवं वर्षा जल बचाए रखने की शपथ ली। श्रमदान में तालाब की मिट्टी की खुदाई कर पाळ पर डाली गई व कचरा व पॉलीथिन आदि को हटाया गया। श्रमदान के बाद तालाब का स्वरुप निखरा नजर आया। ढोल-थाली की थाप की गूंज पर करीब ३ घंटे चले श्रमदान का दृश्य मेले जैसा दिखाई दिया। श्रमदान में पालासनी के अलावा बिसलपुर, खारी कला, बिरामी, मियासनी, डांगियावास, पीथावास, गोलिया, सेवालों की ढाणी आदि गांवों के लोगों ने भाग लिया।
श्रमदानियों को दिलाई शपथ-
अभियान की शुरुआत सुबह सात बजे हुई, लेकिन दस बजे तक भी ग्रामीण व कॉलेजों के विद्यार्थी श्रमदान करने के लिए पहुंचे। अभियान में राज इंजीनियरिंग कॉलेज, एसएलबीएस कॉलेज के विद्यार्थियों ने भी श्रमदान किया। लूणी पंचायत समिति के विकास अधिकारी मोहनलाल चौधरी ने श्रमदानियों को पारम्परिक जलस्त्रोतों व वर्षा जल के संरक्षण की शपथ दिलाई। संरपंचों ने भी वर्षा जल संरक्षित करने, पानी का अपव्यय रोकनें, जलस्रोतों को साफ सुथरा रखने पर जोर दिया।
इन्होंने किया श्रमदान
संत चिडिय़ानाथजी आसन के मंहत कैलाशनाथ के शिष्य संत मनोहरलाल तथा देवलिया धाम पालासनी के संत तुलसीराम महाराज के सानिध्य में जलदाय विभाग के सेवानिवृत अधिशाषी अभियंता मंगलाराम गोदारा, लूणी पंचायत समिति के विकास अधिकारी मोहललाल चौधरी, पालासनी सरपंच शंकुन्तला गोदारा, पूर्व सरपंच लक्ष्मणराम गहलोत व हीराराम गहलोत, राज हॉस्पीटल के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी, समाजसेवी भंवरलाल गोदारा, ग्राम विकास अधिकारी सुधीर लिंकन, पंचायत समिति सदस्य नैनीदेवी विश्नोई, धर्माराम गोदारा, बिसलपुर के पूर्व सरपंच छोगाराम चौधरी, डांगियावास सरपंच केसाराम चौधरी, पीथावास सरपंच प्रतिनिधि कोजाराम चौधरी, गोपाराम चौधरी मियासनी, सत्यम गोदारा, देवाराम सोऊ, कमल किशोर गहलोत, मानाराम विश्रोई, नरपतसिंह, मानाराम सीरवी, भोमाराम मेघवाल सहित हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान किया। शपथ कार्यक्रम का संचालन कमल किशोर गहलोत ने किया।
वर्षपर्यंत भरा रहता है पानी
गांव के मौजिज लोगों ने बताया कि यह संत चिडिय़ानाथजी के आसन की पुण्य कृपा है कि पालासनी तालाब में वर्षपर्यंत पानी भरा रहता है। तालाब के पानी को स्वच्छ व पीने योग्य बनाए रखने के लिए यहां वर्षों से पशुओं तक को अन्दर नहीं जाने दिया जाता है।
श्रमदान में मेले जैसा उत्सव-
श्रमदान के उत्साह के दौरान कई महिलाएं ढोल-थाली की थाप पर नाचने लगी। महिलाएं पालासनी के पवित्र सरोवर की सराहना में मंगल गीत भी गा रही थी। महिलाओं के आग्रह पर सरपंच शंकुतला गोदारा भी थिरक उठी।