
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की बाबा रामदेव शोधपीठ ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु और जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित को ज्ञापन सौंपकर जोधपुर हवाईअड्डे पर राजस्थानी भाषा में उद्घोषणा शुरू करने की मांग की है। शोध पीठ के निदेशक डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने बताया कि हवाईअड्डे पर राजस्थानी भाषा में उद्घोषणा के संदर्भ में इसकी संवैधानिक मान्यता का सवाल बीच में नहीं आता है। आकाशवाणी में राजस्थानी भाषा में बुलेटिन आता है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा में राजस्थानी भाषा एक विषय के रूप में है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग राजस्थानी भाषा में नेट/जेआरएफ की मान्यता देता है और अब तक 500 छात्र राजस्थानी में नेट कर चुके हैं। नेपाल में भी राजस्थानी को मान्यता प्राप्त है। वहां पर्यावरण मंत्री हेमराज तातेड़ ने राजस्थानी भाषा में शपथ ली थी। अमरीका में ओबामा प्रशासन ने भी सरकारी नौकरी के आवेदन में राजस्थानी भाषा को शामिल किया था। फरवरी 2017 में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने एक फैसले के दौरान कहा था कि राजस्थान के लोग राजस्थानी में बहस करने के साथ अपनी बात इस भाषा में रख सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने देश के समस्त हवाईअड्डों को फ्लाइट्स ऑपरेशन सहित अन्य नागरिक सेवाओं के लिए उनकी स्थानीय भाषा में उद्घोषणा करने के निर्देश दिए थे। प्रदेश में वर्तमान में जयपुर, जोधपुर और उदयपुर हवाईअड्डा पूरे साल भर संचालित होता है। तीनों जगह हिंदी और अंग्रेजी में उद्घोषणा होती है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं होने से हवाईअड्डा प्रशासन इसमें उद्घोषणा करने से मना कर रहा है। इस संबंध में राजस्थान पत्रिका ने एक जनवरी 2019 के अंक में ‘जोधपुर हवाईअड्डे पर नहीं होगी मारवाड़ी में उद्घोषणा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर राजस्थानी लोगों को ध्यान इस ओर खींचा था।