
गजेंद्र दहिया/जोधपुर. नए साल से देश के कई राज्यों में हवाईअड्डों पर हिंदी और अंग्रेजी के अलावा स्थानीय भाषा में उद्घोषणा शुरू हो जाएगी, लेकिन राजस्थान के जयपुर हवाईअड्डे पर ढूंढाड़ी, उदयपुर में मेवाड़ी और जोधपुर हवाईअड्डे पर मारवाड़ी में उद्घोषणा नहीं होगी। हवाईअड्डा प्रबंधन ने राजस्थान को हिंदी भाषी राज्यों में शामिल करते हुए राजस्थानी भाषा में उद्घोषणा नहीं करने का निर्णय किया है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने पिछले सप्ताह देश के समस्त हवाईअड्डों को फ्लाइट्स ऑपरेशन सहित अन्य नागरिक सेवाओं सम्बंधी उद्घोषणा स्थानीय भाषा में करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी। कुछ हवाईअड्डों पर नए साल के पहले दिन से स्थानीय भाषा में उद्घोषणा शुरू हो रही है। पंजाब में पंजाबी, महाराष्ट्री में मराठी, गोवा में कोंकणी, तमिलनाडू में तमिल, कर्नाटक में कन्नड़, केरल में मलयालम, आंध्रप्रदेश में तेलगू, उड़ीसा में उडिय़ा, जम्मू कश्मीर में उर्दू व डोगरी भाषा में उद्घोषणा होगी।
राजस्थानी भाषा को नहीं मान्यता प्राप्त
देश के संविधान में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इसमें राजस्थानी भाषा शामिल नहीं है। प्रदेश में वर्तमान में जयपुर, जोधपुर और उदयपुर हवाईअड्डा पूरे साल भर संचालित होता है। तीनों जगह हिंदी और अंग्रेजी में उद्घोषणा होती है। राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं होने से इसमें उद्घोषणा करने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राजस्थान को उत्तरप्रदेश, बिहार, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्यों के साथ ही जोडकऱ देखा जा रहा है।
राजस्थानी में नहीं होगी उद्घोषणा
राजस्थान को हिंदी भाषी राज्यों में ही गिना जाता है। ऐसे में यहां केवल हिंदी व अंग्रेजी में ही उद्घोषणा होगी।
जीके खरे, निदेशक, जोधपुर हवाईअड्डा
प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है
राजस्थानी भाषा को मान्यता प्राप्त नहीं है इसलिए फिलहाल राजस्थानी में उद्घोषणा नहीं की जाएगी। फिर भी इसके लिए एएआइ प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है।
जेएस बलारा, निदेशक, जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा