
ये सवाल ये इसलिए उठ रहा है कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मुख्य वन संरक्षक, जोधपुर कार्यालय द्वारा प्रस्ताव वन विभाग मुख्यालय को भेजा गया था, लेकिन कन्जर्वेशन रिजर्व के प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।
कंजर्वेशन रिजर्व नोटिफाइड करने के लिए मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), जोधपुर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन, राजस्थान को फाइल भेजी गई थी। जिस पर विभाग ने प्रस्ताव में रही कुछ कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इन कमियों को पूरा कर फाइल वापस भेजी गई थी। कन्जर्वेशन रिजर्व में करीब 2 सौ पॉइंट जीपीएस कॉर्डिनेट किए गए है। प्रस्ताव पर सहमति के बाद राज्यपाल द्वारा कंजर्वेशन रिजर्व के लिए गजट अधिसूचना जारी होगी। खीचन में कंजर्वेशन रिजर्व घोषित होने के बाद यहां कुरजां के लिए बेहतर वातावरण व सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास होंगे।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका में ८ दिसम्बर २०१६ को प्रकाशित 'कुरजां कैवे कीकर आवां म्हे थारे देसÓ विशेष कवरेज पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वप्रेरणा से संज्ञान लेने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए कुरजां के खीचन में पड़ाव स्थलों को सुरक्षित व उपयुक्त बनाने के लिए कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने सहित कई निर्देश दिए थे। 4 ब्लॉक में 1082 बीघा भूमि को किया है शामिल -
खीचन में कुरजां के लिए कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने के लिए वन्यजीव विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में यहां की १०८२ बीघा भूमि को शामिल किया गया है। प्रस्ताव में कंजर्वेशन रिजर्व के लिए चिन्हित की गई भूमि को अलग-अलग चार टुकड़ों ए, बी, सी और डी में बांटा गया है। जिसमें प्रवासी पक्षी कुरजां को सुरक्षित आवास उपलब्ध करवाने के लिए खसरा नं.१७० की ४०० बीघा, खसरा नं. १४६ की २३३ बीघा १८ बिस्वा, खसरा नं. १८९ की ७९ बीघा १८ बिस्वा, खसरा नं. १४५ की ३१ बीघा १३ बिस्वा, खसरा नं. १८६ की ३९ बीघा ७ बिस्वा, खसरा नं. १८८ की २५ बीघा १८ बिस्वा, खसरा नं. १५३ में स्थित पर्यटन विभाग की ९ बीघा ९ बिस्वा, खसरा नं. १५१/२ में वन विभाग की २४७ बीघा १४ बिस्वा, खसरा नं. १५६ में चुग्गाघर की २ बीघा २ बिस्वा, खसरा नं. १५४ में नदी की १२ बीघा १० बिस्वा भूमि को कंजर्वेशन रिजर्व में लिया गया है।
प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर आते हैं मेहमान परिन्दे -
मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान में बर्फबारी के कारण पैदा हुई विकट परिस्थितियों में डेमोसाइल क्रैन कुरजां शीतकालीन प्रवास पर निकल जाती है। खीचन में प्रतिवर्ष हजारों की तादाद में कुरजां पक्षी सितम्बर माह में आकर फरवरी तक करीब छ: माह शीतकालीन प्रवास करते हैं। इस दौरान खीचन में ये पक्षी अपनी मनमोहक अठखेलियों व आवाज से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने रहते है।
किया जाएगा पत्र व्यवहार -
खीचन में मेहमान पक्षी कुरजां को सुरक्षित आवास उपलब्ध करवाने के लिए कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मुख्यालय को भेजा गया था। इसकी अभी तक स्वीकृति नहीं आई है। इसको लेकर मुख्यालय से पत्र व्यवहार किया जाएगा।
महेश चौधरी, उप वन संरक्षक (वन्यजीव), जोधपुर